फिलीपीन में फंसे भारतीय छात्रों को वापस लाने की राज्यसभा में उठी मांग

नई दिल्ली। राज्यसभा में शुक्रवार को भाजपा के दो सदस्यों ने कोरोना वायरस के कारण भारतीय छात्रों के फिलीपीन में फंस जाने का मुद्दा और सरकार से उनकी जल्दी वापसी सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

भाजपा के सतीश चंद्र दुबे ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनके गृह जिला पश्चिम चंपारण के तीन छात्र सहित देश भर के 540 से ज्यादा छात्र फिलीपीन में फंसे हुए हैं।  उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण सभी उड़ानें रद्द हो गयी हैं।

इस वजह से वे वापस नहीं आ पा रहे हैं। दुबे ने विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया कि वह फिलीपीन में फंसे छात्रों की वापसी की व्यवस्था करे। शून्यकाल में ही भाजपा के किरोड़ीलाल मीणा ने भी यह मुद्दा उठाया और कहा कि राजस्थान के विभिन्न मेडकिल कॉलेजों के करीब 110 छात्र फिलीपीन में फंसे हुए हैं।

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उन्होंने कहा कि वे लोग भारत आने की तैयारी में थे और पूरी व्यवस्था हो गयी थी।  मीणा ने कहा कि आखिरी समय में उड़ानें रद्द हो गयीं और वे लोग पिछले 24 घंटों से हवाई अड्डे पर ही फंसे हुए हैं। वहां कोविड आपातस्थिति लागू हो गयी है। उन्होंने भी फंसे मेडिकल छात्रों को वापस लाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने का सरकार से अनुरोध किया। शून्यकाल में ही माकपा सदस्य झरना दास वैद्य ने कोरोना वायरस को देखते हुए पीडीएस जैसी विभिन्न योजनाओं में बायोमीट्रिक जांच स्थगित किए जाने की मांग की।

शून्यकाल में ही मनोनीत स्वप्न दासगुप्ता ने कई उच्च शिक्षण संस्थानों में नियुक्तियों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशानिर्देशों का पालन नहीं होने का मुद्दा उठाया। पश्चिम बंगाल के एक संस्थान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां पहले अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में यूजीसी के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया। बाद में उन शिक्षकों की नियुक्ति को स्थायी कर दिया गया और उनका कार्यकाल 65 साल की आयु तक होगा।

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