एजीआर के निर्णय से प्रभावित डिजीटल इंडिया: टेलीकॉम ऑपरेटर

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय में समायोजित सकल राजस्व (एडजस्टेड ग्रॉस रिवेन्यू) अर्थात एजीआर मामले पर दूरसंचार विभाग की अपील मंजूर करने को टेलीकॉम कंपनियों और दूरसंचार सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के शीर्ष संगठन सीओएआई ने गहरी निराशा व्यक्त करते हुये कहा कि इसका दूरसंचार उद्योग पर 92 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा और डिजिटल इंडिया अभियान प्रभावित होगा।  सीओएआई के महानिदेशक राजन एस मैथ्यूज ने यहां जारी बयान में कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय से इस उद्योग पर 92 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।

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लगभग 120 करोड़ उपभोक्ता वाला यह क्षेत्र उपभोक्ता लाभ, रोजगार, राजस्व बढ़ाकर भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भागीदारी कर रहा है और देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 6.5 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षाें में दूरसंचार कंपनियों ने 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर विश्व स्तरीय मोबाइल नेटवर्क बनाया है और भारत में दुनिया का सबसे सस्ता टैरिफ है। यह उद्योग अभी बहुत ही खराब समय से जुगर रहा है। यह उद्योग चार लाख करोड़ रुपये के ऋण के भार तले दबा है और टेलीकॉम कंपनियों को उनके निवेश पर रिणात्मक रिटर्न मिल रहा है।

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कंपनियों में लाभ पर लगातार दबाव बना हुआ है जबकि उद्योग पर ब्याज का भार बढ़ रहा है। श्री मैथ्यूज ने कहा कि भारतीय टेलीकॉम उद्योग पर 29 से 32 प्रतिशत तक कर और उपकर का बोझ है जो विश्व में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय से भारी कर्ज तले दबे इस उद्योग पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा और डिजिटल इंडिया को क्रियान्वित करने पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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