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संभागायुक्त ने अवैध रेत उत्खनन की मांगी जानकारी

मुरैना। मध्यप्रदेश की चंबल संभागायुक्त रेनू तिवारी ने चंबल नदी से हो रहे अवैध रेत उत्खनन मामले में वनमंडलाधिकारी को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार चंबल संभागायुक्त तिवारी ने एक बार फिर वनमण्डलाधिकारी पी ड़ी ग्रेवियल को पत्र लिखकर जबाव मांगा है कि रेत के अवैध खनन पर रोक के लिए अभी तक कार्यवाई क्यों नहीं की गयी।

तिवारी ने कहा है कि प्रायः देखा गया है कि रात्रि के समय चंबल राजघाट से बड़ी संख्या में ट्रैक्टर ट्राॅलियों द्वारा रेत का परिवहन किया जा रहा। उन्होंने कहा है कि अवगत कराया जाये कि राजघाट से रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर अभी तक रोक क्यों नहीं लग सकी है।

आयुक्त श्री तिवारी ने वनमण्डलाधिकारी को कहा है कि इसके लिये क्या-क्या कार्रवाई की गयी है, तत्काल चंबल अायुक्त को अवगत कराया जाए।  तिवारी ने पिछले माह भी रेत उत्खनन को रोकने के लिये वन मण्डलाधिकारी को एक पत्र लिखा था, लेकिन उसके बाबजूद भी चंबल अभ्यारण्य क्षेत्र से रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन जारी है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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