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बिना पाइलेट के नहीं उड़ा सकेंगें ड्रोनः बिना लाइसेंस और योग्यता के 25 हज़ार तक देना होगा जुर्माना

Drone Attack in Jammu

New Delhi: भारत सरकार (Government of India) ने देशभर में एक नया नियम लागू किया है. इसके अनुसार अब 250 ग्राम से ज्यादा वजन के ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस और ट्रैनिंग अनिवार्य कर दी गयी है. इसका नाम मानव रहित विमान प्रणाली नियम 2021 नाम दिया है. ये नियम 12 मार्च से लागू हो गए हैं. इस नियम के तहत अब कोई भी बिना पाइलेट लाइसेंस (license) ड्रोन नहीं उड़ा सकेगा. इसका अर्थ हुआ कि अब शादियों के साथ ही अन्य किसी समारोह में ड्रोन उड़वाने के लिए  लाइसेंस वाले पायलट की जरूरत होगी.यदि कोई व्यक्ति लाइसेंस के बिना ड्रोन उड़ाता है तो इसके लिए आपको 25 हजार तक का जुर्माना देना पड़ सकता है. सरकार ने लाइसेंस के लिए योग्यता भी निर्धारित की है.  इसके तहत पाइलेट को लाइसेंस के लिए न्यूनतम 18 वर्ष की उम्र, दसवीं तक की पढ़ाई, मेडिकली फिट होने के साथ साथ सरकारी परीक्षा (government examination) भी पास करनी होगी. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation)  ने ड्रोन बनाने, बेचेन-खरीदने, ऑपरेशन से जुड़े नियमों की अधिसचूना जारी कर दी है. इन नियमों के तहत अब ड्रोन के निर्माण, ऑपरेशन, आयात, निर्यात, ट्रांसफर और कारोबार के लिए पहले सरकार से मंजूरी लेना अनिवार्य है. ड्रोन को रेगुलेट करने और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी डीजीसीए की रहेगी. वजन के हिसाब से ड्रोन को नेनो, माइक्रो, स्मॉल, मीडियम और लार्ज श्रेणी में बांटा गया है. नेनो ड्रोन के अलावा सभी ड्रोन्स को ऑपरेट करने के लिए परमिट, लाइसेंस और बीमा लेना जरूरी कर दिया गया है. देश में पहले से मौजूद सभी ड्रोन्स को अब उड़ाने से पहले नए मानकों को पालन करना होगा.

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बिना लाइसेंस के ड्रोन उड़ाना होगा दंडनीय अपराध

दुर्घटना पर मोटर व्हीकल अधिनियम की तर्ज पर नुकसान का भुगतान करने का भी नए नियमों में प्रावधान किया गया है. नए नियमों में बिना लाइसेंस के ड्रोन उड़ाना, हथियारों और खतरनाक चीजों का ले जाना, प्रतिबंधित क्षेत्रों में उड़ाना और फोटोग्राफी (photography) करने को दंडनीय अपराध (punishable crime) बना दिया गया है. फोटोग्राफी के दौरान लोगों की निजता का ख्याल रखना होगा. एयरपोर्ट्स, सैन्य संस्थानों के निकट और अंतराष्ट्रीय सीमाओं के भीतर 25 किलोमीटर तक ड्रोन की उड़ानों को प्रतिबंधित कर दिया गया है. राज्यों के सचिवालय, विधानसभा और रक्षा संस्थानों (military institutions) के आसपास भी ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होगी.

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ड्रोन उडाने से पहले लेनी होगी अनुमति

एयरक्राफ्ट की तर्ज पर ही अब ड्रोन की हर फ्लाइट के लिए अनुमति लेनी होगी. इसके लिए डीजीसीए को ऑनलाइन आवेदन करना होगा. नेनो के अलावा हर ड्रोन की फ्लाइट पर ऑनलाइन परमिशन लेनी होगी. नेनो ड्रोन के अलावा बंद परिसर में कोई भी ड्रोन नहीं उड़ पाएगा. मानव रहित विमानों के रिसर्च में लगे संस्थानों को मंजूरी लेनी होगी. नेनो ड्रोन का भार 250 ग्राम तक सीमित होगा, इससे ज्यादा वजन के सभी ड्रोन पर नियम लागू होंगे. नेनो ड्रोन 15 मीटर, माइक्रो ड्रोन 60 मीटर और स्माल ड्रोन 120 मीटर तक की ऊंचाई पर उड़ पाएगा. ड्रोन के खो जाने, टूटने-फूटने पर सरकार को सूचना देनी होगी. केंद्र के ड्रोन नियम बनाने में राजस्थान यूनिवर्सिटी (Rajasthan University)के छात्र रहे और डीजीसीए नई दिल्ली के सहायक निदेशक डॉ. रामस्वरूप मंगलाव का अहम योगदान रहा है. मंगलाव गंगानग लॉ में डॉक्टरेट हैं, वे सीबीआई में भी बतौर लोक अभियोजक अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

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