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बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने किया राष्ट्रव्यापी कार्य बहिष्कार

जालंधर। ऑल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स के कर्मचारियों ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट में संशोधन कर निजीकरण के प्रस्ताव को वापस लेने और पुरानी पेंशन प्रणाली लागू करने की मांग को लेकर बुधवार को राष्ट्रव्यापी कार्य का बहिष्कार किया।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बताया कि बिजली कर्मचारी बिजली निगमों का एकीकरण कर पुनर्गठन करने, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट में संशोधन कर निजीकरण के प्रस्ताव को वापस लेने और पुरानी पेंशन प्रणाली लागू करने की मांग कर रहे है।

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ऑल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन के प्रवक्ता विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि बिजली कर्मचारियों और अभियन्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। उत्तरप्रदेश, हरियाणा, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र से थी। कर्नाटक, असम, बिहार, हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियन्ताओं ने राष्ट्रव्यापी कार्य का बहिष्कार किया। गुप्ता ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट में प्रस्तावित प्रतिगामी संशोधन एवं नेशनल टैरिफ पॉलिसी के अधिकांश प्रावधान जन विरोधी हैं।

सबसे घातक विद्युत आपूर्ति को विद्युत वितरण से अलग कर निजी कम्पनियों को विद्युत आपूर्ति के लाइसेन्स देना है। राज्य सरकार विद्युत पारेषण और वितरण का नेटवर्क बनायेगी तथा इसका रखरखाव करेगी। नेटवर्क बनाने व रखरखाव करने पर राज्य सरकार अरबों रूपये खर्च करेगी और बिना एक भी पैसा खर्च किये इस नेटवर्क के जरिये बिजली आपूर्ति कर निजी कम्पनियां भारी मुनाफा कमायेंगी।

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स्वाभाविक तौर पर इस प्रकार सरकारी आपूर्ति कम्पनी घाटा उठाने वाली कम्पनी बन कर रह जायेगी। इस संशोधन के बाद उप्र में किसानों और आम उपभोक्ताओं को रू 10 प्रति यूनिट से कम पर बिजली नहीं मिलेगी। गुप्ता ने कहा नई नीति के तहत तीन वर्षो में धीरे धीरे सब्सिडी समाप्त कर दी जायेगी। लागत से कम मूल्य पर किसानों, गरीबों और घरेलू उपभोक्ताओं को दी जाने वाली बिजली सब्सिडी नीति के अन्तर्गत आती है।

जिसके घाटे की आंशिक भरपाई वाणिज्यिक तथा औद्योगिक उपभोक्ताओं को लागत से अधिक मूल्य पर दी जाने वाली बिजली से की जाती है। इसे क्रास सब्सिडी कहा जाता है। क्रास सब्सिडी समाप्त होने से वाणिज्यिक व औद्योगिक उपभोक्ताओं की बिजली जहां सस्ती हो जायेगी वहीं सब्सिडी समाप्त होने से आम लोगों की बिजली मंहगी हो जायेगी। इस प्रकार यह संशोधन आम उपभोक्ता विरोधी व उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाला है। नये संशोधन के बाद बिजली आपूर्ति में केन्द्र की सीधी दखलंदाजी होगी जो राज्यों के अधिकार क्षेत्र का हनन है। इस प्रकार नया संशोधन राज्यों के हितों के विपरीत है।

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