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Monday, April 19, 2021
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Maharasthra Police वसूली रैकेट मामले में आया एनकाउंटर किंग प्रदीप शर्मा का भी नाम, NIA ने की पूछताछ, वाझे से बार—बार क्यों मिले?

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मुंबई | महाराष्ट्र पुलिस वसूली रैकेट मामले में तीन सौ से अधिक अपराधियों को खत्म करके एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से प्रसिद्ध पूर्व वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रदीप शर्मा का नाम भी जुड़ा है। एनआईए ने इस मामले में एनकाउंटर किंग शर्मा से लम्बी पूछताछ की है। उनसे पूछा ​गया है कि वे सचिन वाझे से बार—बार क्यों मिल रहे थे। आपको बता दें कि प्रदीप शर्मा शिवसेना के टिकट पर 2019 का चुनाव भी लड़ चुके हैं। सचिन वाझे उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास विस्फोटकों से लदी एसयूवी स्कॉर्पियो और उसके मालिक मनसुख हीरेन की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है।

प्रदीप शर्मा, जिनके काम पर कई फिल्में बॉलीवुड में बन चुकी हैं, जिनमें ‘अब तक छप्पन’, ‘सत्या’, ‘कंपनी’ सहित अन्य फिल्में शामिल हैं। सचिन वाजे की ओर से पुलिस मुठभेड़ों में 63 बदमाशों को एनकाउंटर करने का दावा किया जाता है, जबकि प्रदीप शर्मा के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपने 35 वर्ष के पुलिस कैरियर में 300 से अधिक अपराधियों को मौत की नींद सुला दिया था। यही नहीं प्रदीप शर्मा को उनकी टीम के सदस्य ‘एनकाउंटर किंग’ भी कहते हैं। अब शर्मा का इस केस में नाम आने के बाद एक नया और रोचक मोड़ आ गया है। आपको बता दें कि इस मामले के तूल पकड़ने के बाद महाराष्ट्र के गृहमंत्री को इस्तीफा तक देना पड़ा है। प्रदीप शर्मा और क्राइम ब्रांच में उनके पूर्व सब-इंस्पेक्टर, सचिन वाजे दोनों ने दाऊद इब्राहिम गिरोह के दर्जनों शार्पशूटरों को मार गिराया था।

सूत्रों ने कहा कि प्रदीप शर्मा से इस मामले में पूछताछ में सचिन वाजे से जुड़े कई पुलिस और राजनीतिक नेताओं की भूमिका भी सामने आ सकती है। आईएएनएस को बताया कि 2019 में शिवसेना के टिकट पर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लड़ने वाले प्रदीप शर्मा वाजे के साथ नियमित संपर्क में रहे हैं। बताया जा रहा है कि हत्या और एंटीलिया मामले में आरोपी बनाए गए पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की ओर से इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन के कॉल डेटा रिकॉर्ड से यह खुलासा हुआ है। अंबानी के घर के पास विस्फोटक से लदी एक एसयूवी प्लांट क्यों की गई और उच्च अधिकारियों के साथ सचिन वाजे के संबंधों की पड़ताल के लिए एनआईए ने बुधवार को शर्मा को अपने मुंबई कार्यालय में तलब किया।

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता राम कदम ने कहा है कि जबरन वसूली रैकेट में शामिल पुलिस और राजनेताओं के इस गठजोड़ का पर्दाफाश होगा। उन्होंने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी पर्याप्त सबूत इकट्ठा करेगी और जबरन वसूली रैकेट का संरक्षण करने वाले सरकार में शामिल नेताओं को बेनकाब करेगी। इस मामले में एनसीपी के नेता शरद पवार ने भी पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख का बचाव करने की कोशिश की, लेकिन हाईकोर्ट द्वारा मामला सीबीआई को सौंप दिए जाने के बाद देशमुख ने अपना इस्तीफा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को सौंप दिया। यहां दिलिप वलसे पाटिल को नया गृहमंत्री बनाया गया है।

यह कड़ियां जुड़ रही है
कभी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और अब शिवसेना के नेता प्रदीप शर्मा कभी क्राइम ब्रांच में वाजे के बॉस रहे थे। उन्होंने मार्च के पहले सप्ताह में मुंबई पुलिस मुख्यालय में अपने वाजे से मुलाकात की थी। वाजे से मिलने के अलावा, शर्मा की मुलाकात विनायक शिंदे से भी हुई थी। विनायक शिंदे मनसुख हिरेन की हत्या में वाजे के साथ ही एक सह आरोपी है। विस्फोटक से लदी एसयूवी मनसुख हिरेन की थी। इस मामले में सह आरोपी विनायक शिंदे एक कांस्टेबल हैं और पहले वे प्रदीप शर्मा से मुलाकात कर चुके हैं।

प्रदीप शर्मा के जरिए ही उसकी मुलाकात सचिन वाजे से हुई थी। क्राइम ब्रांच कार्यालय के बाहर सचिन वाजे और प्रदीप शर्मा के बीच एक और महत्वपूर्ण बैठक की बात सामने आई है। कहा जा रहा है कि शर्मा और वाजे कई बार मिले और उसके बाद वाजे अपने कार्यालय में नजर नहीं आए। 13 मार्च की रात को एनआईए ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। तीन बार के भाजपा विधायक राम कदम ने कहा कि प्रदीप शर्मा से पूछताछ महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिवसेना पर ही आरोप लगाए और कहा कि आखिर शिवसेना के शीर्ष नेतृत्व के करीबी अधिकारी जांच के घेरे में क्यों हैं?

पढ़ें वेद प्रताप वैदिक का विशेष आलेख : महाराष्ट्रः राजनीति और भ्रष्टाचार

दोनों शिवसेना में आए
कहा जाता है कि प्रदीप शर्मा और सचिन वाजे पुलिस विभाग में अपने शुरुआती दिनों से ही करीब थे। बाद में यह मुठभेड़ जोड़ी राजनीतिक पार्टी शिवसेना नेतृत्व के करीब आ गई। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा से भी पहले सचिन वाजे शिवसेना में शामिल हुए थे। वाजे 2007 में शिवसेना में शामिल हुए थे और उन्हें पार्टी का प्रवक्ता नियुक्त किया गया था। 2019 के अंत में जब महाराष्ट्र में शिवसेना सत्ता में आई, तो सचिन वाजे की सेवा राज्य सरकार द्वारा बहाल कर दी गई थी।

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