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ये कैसा प्यार: चलती ट्रेन में दुल्हन के माथे के सिंदूर को पोछा, तो झूम उठी लड़की

भागलपुर | अपने देश में प्रेम विवाह को अभी भी नीची निगाहों से देखा जाता है. यही कारण है कि जब प्रेम प्रसंग में चल रहे रिश्ते लोगों की नजरों से बचकर एक होना चाहते हैं तो वह एक खबर बन जाती है. ऐसा ही एक मामला बिहार के भागलपुर में रहने वाले जोड़े का सामने आया है. इस जोड़े ने ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को अचानक से चौंका दिया. युवक ने अपने साथ है युवती के मांग का सिंदूर पहले तो अपने हाथों से पूछ लिया और इसके बाद युवती ने अपने पास से एक सिंदूर की डिब्बी निकाल कर दी जिससे एक बार फिर से युवक ने उसकी मांग भर दी. इसके बाद दोनों एक दूसरे का हमेशा साथ देने और सात जन्मों तक रिश्ते निभाने की कसमें खाने लगे.

फिल्मी सीन देख यात्री भी हो गए चकित, वीडियो वायरल

चलती ट्रेन में शादी शायद किसी ने सुनी या देखी होगी. कुछ ऐसा ही हाल ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों का भी हो गया. कुछ यात्रियों ने तालियां बजाकर इन दोनों का हौसला बढ़ाना शुरू कर दिया. वही किसी ने इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो रिकॉर्ड कर लिया जिसे बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाल दिया. सोशल मीडिया में वीडियो डाले जाने के तुरंत बाद से वीडियो वायरल हो गया और लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे. हालांकि सोशल मीडिया में शादी को कुछ लोगों ने गलत भी ठहरा है क्योंकि लड़की पहले से शादीशुदा थी. लोगों का कहना था कि यदि उसे अपने प्रेमी के साथ विवाह करना था तो अपने मां बाप के दबाव में पहले उस लड़के से विवाह नहीं करना चाहिए था क्योंकि इससे उसकी और उसके परिवार की जिंदगी खराब हो गई.

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लंबे समय से चल रहा था प्रेम-प्रसंग

भागलपुर के सुल्तानगंज प्रखंड में रहने वाले इस प्रेमी जोड़े का संबंध लंबे समय से चल रहा था. यही कारण है कि जब लड़की के घर वालों को इस बात की भनक लगी तो उन्होंने जल्दी बाजी में 3 महीने पहले ही लड़की की शादी करा दी. इसके बाद प्रेमी परेशान हो गया और जहां प्रेमिका की शादी हुई थी वही जाकर रहने लगा इस दौरान दोनों ने भागने का निर्णय लिया और भागते समय ही ट्रेन में अपनी शादी कर ली. यहां यह स्पष्ट कर दें कि इस तरह की शादी ना तो कोर्ट में मान्य है और ना ही धार्मिक परिपेक्ष्य में ही.

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By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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