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आखिरकार हमने समझी पेड़-पौधों की कीमत, शुरुआत हुई बागेश्वर धाम से

बागेश्वर| कोरोना काल हमारे लिए सबसे बुरा दौर रहा है। लेकिन इसने हमें बहुत कुछ सिखा दिया है। कोरोना की दूसरी लहर ने हमसे हमारे प्रियजनों को छीना है। ऑक्सीजन का संकट भी दूसरे लहर में ही आया है। ऑक्सीजन का महत्व दूसरी लहर में पता चला। इसके बाद लोगों ने पर्यावरण की ओर ध्यान देना शुरु किया है। पर्यावरण की रक्षा और ऑक्सीजन की कमी दूर करने के लिए इसकी शुरुआत बुंदेलखंड के बागेश्वर धाम से हुई है। बागेश्वर धाम ने सवा 11 लाख पौध लगाने का निश्चय किया है। इसकी शुरुआत धाम के पण्डित  धीरेंद्र शास्त्री ने 51 पौधे लगाकर की है। हमने पर्यावरण को नष्ट कर दिया है। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के बाद अधिकांश लोगों को पर्यावरण का मतलब समझ आया है और लोगों ने पर्यावरण को बचाने का संकल्प लिया है। कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी को देखकर बागेश्वर धाम ने सवा 11 लाख वृक्ष रौपने की निश्चय किया है। पूरे बुंदेलखंड की ग्राम पंचायतों में बागेश्वर बगीचा नाम से ये पौधे लगाए जाएंगे।

पूरे बुंदेलखंड की ग्राम पंचायतों में बागेश्वर बगीचा नाम से ये पौधे लगाए जाएंगे.

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पर्यावरण को बचाने का संदेश

पन्ना में आज अचानक बागेश्वरधाम  पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण जेल के पास पुरुषोत्तमपुर पहुंचे और उन्होंने 51 पौधे रौंपकर इसकी शुरुआत की। धीरेंद्र कृष्ण ने पीपल और बरगद के 51 पौधे लगाए। पेड़ लगाने के बाद कहा कि कोरोना की इस भयावह महामारी में ऑक्सीजन की कमी से लोगों को बहुत समस्याओं का सामने करना पड़ा है। हम शहर बसाने के चक्कर नें पेड़ काटते गए और पर्यावरण के नष्ठ कर दिया। इसकी वजह से ऑक्सीजन की समस्या पैदा हुई। हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ करेंगे तो हमें किसी ना किसी रूप में भपगतना पड़ेगा। इसी कारण हमें कोरोना महामारी से सामना करना पड़ रहा है। हालात को देखते हुए बागेश्वर धाम से शिष्य मंडल ने यह फैसला किया है कि इस साल पूरे बुंदेलखंड में सवा ग्यारह लाख वृक्ष लगाए जाएंगे और सभी वृक्षों को बचाया भी जाएगा।

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पर्यावरण बचाने का संकल्प

पन्ना जेल परिसर के पास में ही बागेश्वर वाटिका का उद्घाटन किया। धीरेंद्र कृष्ण ने पूरे विधि-विधान और पूजन पाठ के साथ सबसे पहले पीपल का वृक्ष लगाया और इसके बाद बरगद पौधा रौंपा। सभी  शिष्यों से अपील की कि हर शिष्य इस वर्ष 5, 11 , 21 या 101 वृक्ष लगाए और पौध बचाने का संकल्प लें। इन सभी वृक्षों को पाल पोस कर बड़ा करेंगे और इन वृक्षों की सेवा के साथ अपने नजदीकी मित्रों और परिवारजनों को वृक्षों का महत्व बताएंगे। इससे आने वाली पीढ़ी पेड़-पौधों का मतलब समझेगी। और वह भी इसके लगाने में मदद करेगी। इससे पर्यावरण की रक्षा होगी और भविष्य में कभी ऐसी बीमारी आयी तो इतनी भयावह नहीं हो सकेगी।

एक हिंदू-एक गाय

बागेश्वर सरकार ने कहा पूरे बुंदेलखंड में यदि हम सवा लाख पेड़ लगाकर उन्हें पाल पोस कर बड़ा करेंगे तो हमें लाखों मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिलेगी और पूरे बुंदेलखंड को हरा-भरा किया जा सकेगा। यदि भविष्य में ऐसा कोई संकट आता है तो आसानी से सामना कर कते है। उन्होंने कहा जहां आज से 20 वर्ष पहले जंगल था अब वह इलाका वीरान हो गया है। लगातार वृक्ष कट रहे हैं ऐसे में मानव जाति के साथ प्रकृति में संकट पैदा होगा। मानव जाति संकट में आ गई है। प्राकृतिक नुकसान के कारण महामारी आ रही हैं। उन्होंने अपील की कि प्रकृति को बचाना है। गौ माता की भी सेवा करना है। उन्होंने संकल्प दिलाया एक हिंदू एक गाय के संकल्प से ही गाय को बचाया जा सकता है। पेड़ लगाकर प्रकृति की सेवा की जा सकती है। प्रकृति की सेवा करेंगे तो प्रकृति हमें इसका उपहार भी देंगी।

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