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बाइडेन से मिलेंगे फिनलैंड, स्वीडन के नेता

joe biden xi jinping

वाशिंगटन। यूक्रेन पर रूस के हमले के तीन महीने होने जा रहे हैं और इस बीच अमेरिका व यूरोपीय देश रूस की चौतरफा घेराबंदी कर रहे हैं। नए घटनाक्रम में फिनलैंड और स्वीडन दुनिया के सबसे बड़े सैन्य गठबंधन नाटो की सदस्‍यता लेने जा रहे हैं। अपने देश की संसद से मंजूरी हासिल करने के बाद दोनों ने इसके लिए औपचारिक रूप से आवेदन कर दिया है। ये आवेदन दोनों देशों के विदेश मंत्रियों द्वारा लिखे गए एक पत्र के जरिए किया गया है। इस पर अब नार्थ एटलांटिक कौंसिल में चर्चा होगी। दोनों देशों को इसकी सदस्‍यता हासिल करने में एक वर्ष तक का समय लग सकता है।

इस बीच फिनलैंड और स्‍वीडन के नेताओं की अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन से व्‍हाइट हाउस में मुलाकात होनी है। ये मुलाकात अपने आप में बेहद खास है। इस मुलाकात में रूस के रवैये पर चर्चा हो सकती है वहीं कई दूसरे बड़े मसलों पर भी विचार विमर्श किया जा सकता है। खास बात ये है कि इन दोनों नेताओं को खुद राष्‍ट्रपति बाइडेन ने चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। दोनों ही देशों ने अपनी अपनी संसद में नाटो में शामिल होने के प्रस्‍ताव को मंजूरी मिलने के बाद ही आवेदन दाखिल किया है।

फिनलैंड और स्‍वीडन की अमेरिकी राष्‍ट्रपति से होने वाली मुलाकात पर रूस की भी नजर रहेगी। अगर ये दोनों यूरोपीय देश नाटो की सदस्‍यता ग्रहण करते हैं तो रूस की सीमा रेखा तक नाटो के सैनिकों की दस्‍तक हो जाएगी। रूस इसे चाहकर भी नहीं रोक सकता। ध्यान रहे यूक्रेन  नाटो की सदस्यता न ले इस चिंता में ही रूस ने उसके ऊपर हमला किया है। अगर दो यूरोपीय देश नाटो की सदस्यता लेते हैं तो उन पर हमला करने की हिम्मत रूस नहीं कर पाएगा क्योंकि फिर उनके ऊपर हमले को नाटो के ऊपर हमला माना जाएगा।

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