free grain scheme modi मुफ्त अनाज योजना चुनाव तक
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मुफ्त अनाज योजना चुनाव तक

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अगले साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव तक मुफ्त अनाज योजना चलाने का फैसला किया है। इससे पहले सरकार की ओर से खबर आई थी कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना की मियाद 30 नवंबर को पूरी हो रही है और उसके बाद इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इस खबर के बाद ही उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी ओर से गरीबों को पांच किलो अनाज देने की योजना छह महीने और चलाने की घोषणा की थी। अब केंद्र सरकार ने इस योजना को चार महीने यानी 31 मार्च 2022 तक बढ़ाने का फैसला किया है।

इस योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से करीब 80 करोड़ लोगों को हर महीने पांच किलो अनाज और एक किलो दाल दी जाती है। कोरोना वायरस की महामारी शुरू होने के बाद लगाए गए लॉकडाउन के दौरान यह योजना शुरू की गई थी। बाद में इसे 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ाया गया और उसके बाद फिर इसे दो बार बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस योजना को चार महीने बढ़ाने का फैसला किया गया।

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इसके अलावा केंद्रीय कैबिनेट में एक और बड़े फैसले में सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर को गुरु नानक देव की जयंती के दिन इन तीनों कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था। कैबिनेट की मंजूरी के बाद कानून वापसी के प्रस्ताव को संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों में पारित करवाया जाएगा। फिर इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद किसान आंदोलन की वजह बने तीनों कृषि कानून खत्म हो जाएंगे। कैबिनेट बैठक में किसानों की अन्य मांगों जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की कानूनी गारंटी देने के मसले पर चर्चा नहीं हुई।

बहरहाल, बताया जा रहा है कि 29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के पहले तीन दिन में ही इन तीनों विवादितों कानूनों को वापस लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। गौरतलब है कि तीनों कृषि कानूनों को 17 सितंबर, 2020 को लोकसभा ने मंजूर किया था। राष्ट्रपति ने तीनों कानूनों के प्रस्ताव पर 27 सितंबर को दस्तखत किए थे। इसके बाद से ही किसान संगठनों ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया था। किसानों इन कानूनों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई किसानों ने 26 नवंबर 2020 को शुरू की, जब वे दिल्ली की सीमा पर आकर धरने पर बैठे। शुक्रवार 26 नवंबर को किसान आंदोलन के एक साल पूरे हो रहे हैं। किसान अब भी आंदोलन पर बैठे हैं।

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