गांधी परिवार को पर्याप्त सुरक्षा कवर रहेगा : शाह - Naya India
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गांधी परिवार को पर्याप्त सुरक्षा कवर रहेगा : शाह

नयी दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने आज स्पष्ट किया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, श्री राहुल गांधी और श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षा पुराने कानून के प्रावधानों के अनुरूप पेशेवराना सुरक्षा आकलन के बाद बदली गयी है और उन्हें केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल की ‘ज़ेड प्लस विद एएसएल’ का पर्याप्त सुरक्षा कवर मिलता रहेगा।

शाह ने बुधवार को लोकसभा में स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) संशोधन विधेयक 2019 पर चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए कहा कि गांधी परिवार की सुरक्षा बदलने का फैसला 1988 के पुराने कानून के तहत विशुद्ध पेशेवराना सुरक्षा आकलन के बाद किया गया है।

नये कानून के बनने के बाद अगर किसी की सुरक्षा घटेगी तो श्री नरेन्द्र मोदी की घटेगी। श्री मोदी के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद छठवें साल एसपीजी कवर हट जाएगा। गृह मंत्री ने कांग्रेस के राजनीतिक आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, इंद्रकुमार गुजराल, पी वी नरसिंह राव और मनमोहन सिंह का एसपीजी सुरक्षा कवर भी पेशेवराना सुरक्षा आकलन के बाद वापस लेकर दूसरी प्रकार की सुरक्षा दी गयी थी लेकिन तब किसी ने कोई हो हल्ला नहीं मचाया।

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उन्होंने कहा कि हर भारतीय की सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी सरकार की है और उसी के तहत गांधी परिवार के भी देश के नागरिक होने के नाते उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी है। उन्होंने कहा, “राजनीतिक प्रतिशोध मेरी पार्टी का संस्कार नहीं है। मैं आश्वस्त करता हूं कि उनकी सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की गयी है।”

शाह ने कहा कि ज़ेड प्लस विद एएसएल सुरक्षा के तहत उनके दौरे के पहले स्थान का सुरक्षा बल दौरा करेंगे तथा उनके सुरक्षा दस्ते में एम्बुलेंस भी रहेगी। सुरक्षाकर्मियों की संख्या पहले से अधिक ही रहेगी, कम कतई नहीं होगी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति जे एस वर्मा आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख किये जाने पर कहा कि सरकार ने भी उस रिपोर्ट को पढ़ा है और उसी से सबक लेकर एसपीजी हटाने से पहले सुरक्षा के वैकल्पिक पुख्ता इंतजाम किये हैं।

उन्होंने कहा कि डॉ सिंह की सुरक्षा में बदलाव के पहले गुप्तचर ब्यूरो के निदेशक ने उनसे भेंट की थी और उन्हें व्यक्तिगत रूप से पूरी जानकारी दी थी। इसके बाद उनके कार्यालय एवं सुरक्षा अधिकारियों की संयुक्त बैठक में हैंड ओवर टेक ओवर किया गया। लेकिन गांधी परिवार के मामले में सुरक्षा आकलन एक नहीं बल्कि दो बार किया गया था। जब एसपीजी के निदेशक ने फोन करके उनसे आने की अनुमति मांगी तो कहा गया कि आप जो चाहो कर लो। बाद में उनके स्टाफ के साथ मीटिंग में हैंड ओवर टेक ओवर हुआ।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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