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सिर्फ तीन देशों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का अधार बताए सरकार: कांग्रेस

नई दिल्ली। कांग्रेस ने नागरिकता (संशोधन) कानून (सीएए) को समान नागरिक होने के संवैधानिक सिद्धांत के विरुद्ध बताते हुए कहा है कि सरकार बताए कि उसने सिर्फ तीन देशों के अल्पसंख्यकों को ही इस कानून के दायरे में लाने का निर्णय किस आधार पर लिया है।

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने आज यहां पार्टी की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि इस कानून का देशभर में विरोध हो रहा है और कई जगह हिंसक घटनाएं भी हुई हैं।

सरकार सिर्फ तीन देशों पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने के लिए इस गैर संवैधानिक कानून के लाने का आधार नहीं बता रही है, इसलिए लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सीमा से लगे अन्य कई देश हैं लेकिन वहां के नागरिकों को यह अधिकार नहीं दिया गया है। उनका कहना था कि अगर पड़ोसी देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी लोगों के लिए सरकार यह कानून लेकर आयी है तो फिर श्रीलंका के तमिलों को इसमें शामिल क्यों नहीं किया गया। श्रीलंका में तमिल भी प्रताड़ित हैं और उनकाे इसमें शामिल किया जाना चाहिए।

प्रवक्ता ने कहा कि यह कानून संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन है क्योंकि इसमें तीन देशों के अलावा अन्य किसी पडोसी मुल्क के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को यह अधिकार नहीं दिया गया है। यह अधिकार क्यों दिया गया इसका कोई प्रमाणिक आधार सरकार नहीं बता रही है। उसे बताना चाहिए कि क्या उसने इन तीन दशों में कोई सर्वेक्षण कराया है, जिसमें कहा गया हो कि वहां अल्पसंख्यक प्रताड़ित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन नागरिकों को प्रताड़ित कह रही है लेकिन प्रताड़ना शब्द का उल्लेख कानून विधेयक में नहीं है।

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