रसोई गैस का सिलेंडर 150 रूपये का करे सरकार : रालोद - Naya India
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रसोई गैस का सिलेंडर 150 रूपये का करे सरकार : रालोद

लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट के मद्देनजर रसोई गैस के दामों में कमी करने की गुजारिश की है।

पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सुरेन्द्र नाथ त्रिवेदी ने आज कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऐतिहासिक गिरावट का लाभ जन जन तक पहुँचाने के लिये पेट्रोल और डीजल के साथ साथ खाना बनाने की गैस की कीमतों में भी ऐतिहासिक कमी की जानी चाहिए।

उन्होने कहा कि मौजूदा गिरावट का लाभ लेने की दृष्टि से सरकारी कम्पनी ओएनजीसी केन्द्र सरकार से उपकर तथा रायल्टी माफ करने की माँग कर रही है। अन्य तेल कम्पनियों की भी यही इच्छा है लेकिन किसी ने इसका लाभ जनता को देने की इच्छा नहीं रखी।

प्रदेश प्रवक्ता ने पेट्रोल की कीमत 40 रूपये और डीजल 25 रूपये प्रति लीटर करने के साथ साथ घरेलू गैस का सिलिण्डर 150 रूपये का करने की माँग करते हुए कहा कि लाक डाउन के कारण गंभीर आर्थिक स्थिति का सामना कर रही जनता के लिये इससे बड़ी राहत मिलेगी।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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