scrap retrospective tax law रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स कानून खत्म होगा
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रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स कानून खत्म होगा

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scrap retrospective tax law नई दिल्ली। केंद्र सरकार रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स यानी पिछली तारीख से टैक्स लगाने के लिए बनाए गए कानून को खत्म करने जा रही है। इसे खत्म करने के लिए एक विधेयक संसद में पेश किया गया है। संचार कंपनी वोडाफोन और ऊर्जा कंपनी केयर्न एनर्जी के साथ भारत सरकार का विवाद इस कानून की वजह से ही चल रहा है। माना जा रहा है कि कंपनियों का भरोसा जीतने और विदेश निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया है।

बहरहाल, केंद्र सरकार ने विवादित रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स कानून रद्द करने के लिए एक बिल गुरुवार को लोकसभा में पेश किया। इसके पास होने के बाद 28 मई 2012 से पहले हुए सौदों में जिन कंपनियों से टैक्स मांगा गया है उनको राहत मिल सकती है। बहरहाल, इसी कानून की वजह से ब्रिटेन की वोडाफोन और केयर्न एनर्जी जैसी कंपनियों के साथ सरकार का टैक्स विवाद हुआ था। दोनों कंपनियों ने रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स की मांग के खिलाफ विदेशी मध्यस्थता अदालतों में मुकदमा दायर किया था और जीत हासिल की थी। केयर्न एनर्जी ने भारत सरकार की विदेशी संपत्ति जब्त करने का आदेश भी जारी करा लिया था।

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बहरहाल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार कराधान कानून संशोधन विधेयक का प्रस्ताव रख रही है। उन्होंने लोकसभा में में कहा- इस विधेयक के जरिए आयकर कानून, 1961 में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा जा रहा है। इसके मुताबिक, सरकार 28 मई 2012 से पहले हुए सौदों में भारतीय संपत्ति के अप्रत्यक्ष हस्तांतरण पर रेट्रोस्पेक्टिव तरीके से टैक्स नहीं मांगेगी। माना जाता है कि भारत में विदेश निवेश का माहौल इस कानून की वजह से बिगड़ा और कंपनियों के साथ सरकार का टकराव बढ़ा।

इसे खत्म करने का बिल पेश करते हुए सीतारमण ने कहा- 28 मई 2012 से पहले भारतीय संपत्तियों के अप्रत्यक्ष हस्तांतरण पर हुई टैक्स की मांग रद्द किए जाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है, लेकिन इसकी कुछ शर्तें होंगी। संबंधित पक्षों को लंबित मुकदमे वापस लेने होंगे और यह हलफनामा देना होगा कि वे किसी तरह का क्षतिपूर्ति या ब्याज का दावा नहीं करेंगे। इसके अलावा ऐसे मामलों में जो रकम वसूल की गई थी वह अब बिना ब्याज लौटाई जाएगी।

सरकार ने कहा है कि पिछले कुछ साल में वित्तीय और बुनियादी ढांचा सेक्टर में बड़े सुधार शुरू किए गए हैं, जिससे देश में निवेश को लेकर सकारात्मक माहौल बना है। आयकर कानून में रेट्रोस्पेक्टिव तरीके से बदलाव किए जाने के बाद कुछ मामलों में टैक्स मांगे जाने से निवेशक बहुत परेशान हुए थे। माना जा रहा है कि कोरोना की महामारी के बाद देश को तत्काल तेज रफ्तार विकास की जरूरत है। विदेशी निवेश में बढ़ोतरी आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा देने में अहम रोल निभा सकती है।

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