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सीएए विरोधी याचिकाओं पर 31 अक्टूबर को सुनवाई

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नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 31 अक्टूबर को सुनवाई होगी। सर्वोच्च अदालत ने इसे लेकर केंद्र सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। इस मामले में दायर नई याचिकाओं पर भी केंद्र को नोटिस जारी किया गया है। केरल सरकार के केंद्र के खिलाफ दाखिल परिवाद को भी मामले के साथ जोड़ा गया है। गौरतलब है कि यह कानून अगस्त 2019 में बना था और तभी से इसका विरोध हो रहा है। इसके विरोध में अनेक याचिकाएं दायर की गई हैं।

सीएए को चुनौती देने वाली सैकड़ों याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई शुरू हुई। पहले दिन सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सरकार की ओर से कुछ जवाब आ गए हैं, लेकिन कुछ जवाब अभी बाकी हैं। दूसरी ओर वहीं याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि याचिकाओं की छंटनी करनी जरूरी है। याचिकाकर्ताओं में से एक एमएल शर्मा ने कहा कि वकीलों के लिए बहस का समय तय हो। यह भी कहा कि पहले दी गई दलीलों का दोहराव न हो।

सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने सुनवाई की। कुल 220 याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इससे पहले 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने सीएए पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि अभी तक भारत सरकार ने इस कानून को लागू करने के नियम नहीं बनाए हैं इसलिए यह कानून लागू नहीं हुआ है।

बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून पर रोक लगाने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है लेकिन अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था और जवाब मांगा है। सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले जो मुख्य पक्ष हैं उनमें कांग्रेस भी है। उसके अलावा त्रिपुरा राज परिवार के वंशज प्रद्योत किशोर देव बर्मन, असम गण परिषद, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, सीपीआई और डीएमके आदि शामिल हैं।

संशोधित नागरिकता कानून के अनुसार धार्मिक प्रताड़ना के चलते 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगीय़ नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन गया था। हालांकि यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है क्योंकि गृह मंत्रालय ने अभी इसे लागू करने के नियम नहीं बनाए हैं।

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