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अस्थि विसर्जन के बाद शवों का विसर्जन, अब गंगा हुई मैली..वैज्ञानिकों के लिए बना चिंता का विषय

हिंदु धर्म में आस्था का प्रतीक है मां गंगा।  मां गंगा का पानी सबसे पवित्र और स्वच्छ माना जाता है।  वाराणसी में गंगा के पानी इन दिनों हरा हो गया है। पिछले कुछ दिनों से गंगा के पानी में भारी मात्रा में शैवाल आ जाने के कारण पानी का रंग हरा हो गया है।  इसे लेकर लोगों में तरह-तरह की आशंकाए बनी गई हैं। गंगा नदी का पानी रहा हो जाने से वाराणसी के लोगों में तरह-तरह की चर्चा बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार शैवाल के जमा होने से गंगा के प्रवाह में कमी आई है और पानी का रंग बदल गया है। गंगा नदी का यह बदलता हुआ रंग इसमें रहने वाले जीवों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। गंगा में शैवाल की बड़ी मात्रा को देखते हुए केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी जांच में जुट गए हैं। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश में लगे है कि गंगा नदी का पानी हरा होने के पीछे क्या कारण है? मान्यता है कि पापनाशिनी गंगा में एक बार सच्चे मन से डुबकी लगाने से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते है। जिस गंगा मां का पानी सदैव शुद्ध रहा करता था ऐसा कहते है कि गंगा के पानी में कभी कीड़े पड़ते है उस गंगा नदी का पानी शैवाल आ जाने के कारण हरा हो गया है।

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सफाई की कमी के कारण मैली हुई गंगा

वैसे तो इन दिनो लॉकडाउन के कारण श्रद्धालुओं गंगा घाट पर आने और डुबकी लगाने की पाबंदी है। लेकिन पूजन करने आ रहे पुजारियों और श्रद्धालु की माने तो गंगा नदी में गंदी काई देखने को मिल रही है। इस प्रकार की काई पोखरों और तालाबों में देखने को मिलती है। पानी को कई दिनोम तक ऐसे ही रख देने से काई जम जाती है। आप अपने घर पर रखी पानी की टंकी कई दिनों तक साफ नहीं करेंगे तो इस प्रकार की काई जम जाएगी। इसी प्रकार गंगा नदी में भी सफाई ना होने के कारण गंगा नदी का कलर बदल गया है। नदी में काई जमने लग गई है। गंगा नदी में इस प्रकार का शैवाल दिखना बेहद चिंताजनक है। आजतक गंगा नदी में ऐसा शैवाल देखने को कभी नहीं मिला है। नमामि गंगे के संयोजक राजेश शुक्ला ने बताया कि गंगा का पानी हरा होने के पीछे गंगा में प्रभाव कम होना हो सकता है। उन्होंने गंगा मंत्रालय से गुहार लगाते हुए कहा कि गंगा के प्रवाह को निरंतर बनाया जाए ताकि जो गंगा का पानी गर्मी के मौसम में घाटों को छोड़ने लगती है और इसकी वजह से रेत पर टीले दिखाई पड़ने लगते हैं वो ना हो, और गंगा का प्रवाह गर्मी के मौसम में भी निरंतर बना रहें।

शवों को प्रवाहित ना करें

राजेश शुक्ला ने यह भी कहा कि गंगा नदी में लोग कोरोना मृतकों का शव प्रवाहित कर रहे है। इससे भी गंगा का पानी दूषित हो रहा है। लोगो को यह सोचना चाहिए कि इससे नदी में प्रदूषण बढ़ सकता है। इसलिए गंगा में किसी हालत में शवों का प्रवाह नहीं होना चाहिए। गंगा नदी में अस्थि विसर्जन किया जाता है लेकिन इस बार तो लोगों ने शवों को ही गंगा में प्रवाहित करना शुरु कर दिया।

बीएचयू के प्रोफेसर ने कहा चिंता का विषय

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के प्रोफेसर और गंगा वैज्ञानिक प्रो. बी.डी त्रिपाठी ने बताया कि गंगा के पानी जो यह दिख रहा है वो ऐसा लग रहा है कि यह माइक्रोबियल माइक्रोसिस्ट है। इस तरह के माइक्रोसिस्ट अमूमन ठहरे हुए पानी या नालों में पाए जाते हैं, और यह देखा गया है कि रूके हुए पानी मे यह ज्यादा तेजी के साथ बढ़ते हैं।  उन्होंने कहा कि फिलहाल देख कर लग रहा है कि आसपास के किसी नाले से बह कर शैवाल आया होगा। अभी गंगा में बहाव कम है तो इसकी वृद्धि देखी जा रही है। लगातार इस प्रक्रिया के बने रहने से गंगा में रहने वाले जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंच सकता है। बरसात के मौसम से पहले वाराणसी में गंगा के कुछ हिस्सों में यह नजारा हर साल देखने को मिलता है। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब पूरे गंगा नदी का पानी हरा रंग का हो गया है। जहां बीएचयू के वैज्ञानिकों ने इसे जांच के लिए लैब भेजा है तो वहीं यह चिंता भी जाहिर की है कि जीवों पर इसका खासा असर पड़ेगा।

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