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वेतन के लिए उद्योग जगत को मिले पैकेज : प्रो मुस्तफा

नई दिल्ली। लॉकडाउन के कारण प्रवासी श्रमिकों के संकट पर संविधान विशेषज्ञ और हैदराबाद के नलसार विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर फैजान मुस्तफा का कहना है कि राज्यों द्वारा श्रम कानूनों में बदलाव किए जाने के बजाय कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए उद्योग जगत को पैकेज दिया जाना चाहिए था।

प्रो मुस्तफा ने कुछ राज्य सरकारों द्वारा श्रम क़ानूनों में बदलाव करने के सवाल पर साक्षात्कार में कहा, श्रम कानूनों में बदलाव करने का यह बिल्कुल गलत वक्त है, क्योंकि कामगार पहले ही तनाव में हैं और उनकी नौकरियां खत्म हो गई हैं। वे अपने घरों को लौट रहे हैं।

उनका संरक्षण किया जाना चाहिए था। अब श्रम कानून खत्म करने का मतलब है कि पूंजीपतियों और उद्योगपतियों द्वारा उनका शोषण किया जाएगा। उन्होंने कहा , अध्यादेश के जरिए हायर एंड फायर का नियम लाया गया है। यह संवैधानिक तौर पर सही नहीं है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने भी अपनी चिंताएं जताई हैं। हम आईएलओ की संधियों के भी विरुद्ध जा रहे हैं, संविधान के भी खिलाफ जा रहे हैं और यह नैतिकता के भी खिलाफ है।

श्रमिकों से जुड़े विभिन्न कानूनों को समाप्त करने के संबंध में संविधान विशेषज्ञ ने कहा, फैक्टरीज अधिनियम, सफाई, पानी, क्रेच की व्यवस्था के बारे में बात करता है। इस कानून को खत्म करने की क्या जरूरत थी? आपको इंस्पेक्टर राज को खत्म करना था, आपको नौकरशाही व्यवस्था को कम करना था, न्यूनतम मजदरी कानून को आपको क्यों कम करना है? यानी इसका मतलब है कि जब कामगार के पास काम नहीं होगा तो उसका शोषण किया जाएगा ।

उन्होंने कहा, समान पारिश्रमिक अधिनियम कहता है कि पुरुषों और महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन मिलेगा, उसे समाप्त करने की क्या जरुरत है? मजदूरों से 12 घंटे काम कराने का कानून भी कर्मचारियों की सेहत के लिए बहुत गलत है।

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