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Corona Impact:अब संक्रमण के कारण निकालनी पड़ रही हैं आंखें, सूरत में मिले सबसे ज्यादा मरीज

Surat: देश में कोरोना की दूसरी लहर लगतार कहर बरसा रही है. इन परिस्थितियों में अब लोगों की उम्मीदें वैक्सीन से ही बंधी हुई हैं. लेकिन कोरोना के वायरस से अब अलग-अलग प्रभाव देखने को मिल रहे हैं. ताजा मामला गुजरात के सूरत से है. यहां एक के बाद एक बढ़ते संक्रमण के बीच अब हैरान करने वाली खबर सुनने को आ रही हैं. यहां के कुछ लोगों में कोरोना संक्रमण से मुक्त होने के बाद गंभीर बीमारियां पाई जा रही हैं. ये बीमारी इतनी बड़ी हैं कि यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया जाए तो मरीज की आंखें तक निकालनी पड़ रही है. इसके साथ ही यदि इलाज में देरी हुई तो मरीज की मौत भी हो जा रही है, सामने आई इस नई परेशानी से लोगों और भी ज्यादा परेशान हैं. इस संबंंध में अब डॉक्टरों को भी कुछ नहीं समझ नहीं आ रहा है.

15 दिन में सामने आए तीन दर्जन से अधिक मामले 

संक्रमण से दीर होने के बाद भी लोग अब गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. गुजरात के सूरत शहर में करीब पंद्रह दिनों में तीन दर्जन से अधिक ऐसे केस सामने आये हैं. इनमें आठ मरीजों की आंखें निकालनी पड़ी. इस पर काम कर रहे मेडिकल विशेषज्ञों ने इस बीमारी का नाम मिकोर साइकोसिस रखा हैं. यहां बता दें कि सूरत में जो मामले सामने आये हैं वे सभी सौराष्ट्र के अलग-अलग क्षेत्र के हैं. डाक्टरों का कहना है कि मिकोर माइकोसिस एक तरह का फंगल इंफेक्शन है. इंफेक्शन नाक और आंख के माध्यम से ब्रेन तक पहुंच जाता है फिर मरीज की मौत हो जाती है.

नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

कोरोना के लक्षण दिखने के बाद भी कई लोग इसे नजरअंदाज कर रहे हैं.  कोरोना की चपेट में आने के बाद मरीज आंख दर्द, सिर दर्द आदि को नजरअंदाज कर देते हैं. बाद में यही नजरअंदाजी मरीज पर भारी पड़ रही है. डाक्टरों की मानें तो कोरोना से स्वस्थ होने के बाद यह फंगल इंफेक्शन पहले साइनस में होता है और 2 से 4 दिन में आंख तक पहुंच जाता है. मगर, आंख से ब्रेन तक पहुंचने में अधिक वक्त नहीं लगता. यहीं कारण है कि  मरीज की आंखें निकाल दी जाती है ताकि ब्रेन तक इंफेक्शन नहीं पहुंचे और मरीज की जान बच सके.

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कमजोर इम्युनिटी वाले लोग होते हैं शिकार

इस नये बीमारी का अध्ययन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह का फंगल इंफेक्शन कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों पर पहले अटैक करता है. डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटिक मरीज इस बीमारी की चपेट में जल्द आते हैं. डाक्टरों का कहना है कि सिर में असहनीय दर्द, आंख लाल होना, तेज दर्द होना और पानी गिरना, आंख का मूवमेंट नहीं होना जैसे लक्षण मिलें तो तुरंत इलाज लेने की जरूरत है. नहीं तो कोरोना संक्रमण के ठीक होने के बाद भी आप को इस तरह की परेशानियों सामने आ जाती हैं.

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राजनीति

आय कर की नई साइट किसका फितूर!

Nirmala Sitharaman

यह समझ में नहीं आने वाली बात है कि आय कर विभाग की नई वेबसाइट बनाने का फितूर पहले किसके दिमाग में आया! और दूसरा सवाल यह है कि इंफोसिस के जरिए साइट बनवाने का आइडिया किसका था? आय कर विभाग की वेबसाइट बहुत अच्छे तरीके से काम कर रही थी। किसी को कोई परेशानी नहीं थी और न कोई शिकायत थी। फिर अचानक एक दिन तय हुआ कि आय कर रिटर्न फाइल करने के लिए नई वेबसाइट बनाई जाएगी। साइट बन कर तैयार हो गई तो इसका खूब प्रचार भी किया गया। करदाताओं को ई-मेल और मैसेजेज के जरिए बताया गया कि नई साइट लांच हो रही है। लेकिन साइट लांच होने के बाद से ठीक से काम नहीं कर रही है और पिछले करीब दो हफ्ते से काफी काम रूका पड़ा है।

जब वेबसाइट में तकनीकी खामी की शिकायतें मिलीं तो वित्त मंत्री ने इसका संज्ञान लिया। उन्होंने इंफोसिस के अधिकारियों से बात की। उन्होंने इंफोसिस के संस्थापकों में से एक नंदन नीलेकणी को टैग करके ट्विट भी किया। उन लोगों ने सुधार के उपाय भी किए पर बात नहीं बनी। अब वित्त मंत्रालय की ओर से इंफोसिस को एक हफ्ते का समय दिया गया है। ध्यान रहे आय कर विभाग ने रिटर्न भरने की तारीख आगे बढ़ा दी है। लोग सितंबर के आखिरी दिन तक रिटर्न भर सकते हैं। लेकिन कोरोना वायरस की दूसरी लहर कम होने के बाद काफी लोग रिटर्न फाइल करने के प्रयास कर रहे हैं। लेकिन वेबसाइट की तकनीकी खामियों के चलते कामयाबी नहीं मिल रही है। सो, सरकार का राजस्व अटका है और चारों तक अफरा-तफरी है। इस बीच यह अटकल भी लगाई जा रही है कि वित्त मंत्रालय या सीबीडीटी में किसने नई वेबसाइट बनवाने का आइडिया दिया था।

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