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चुनावी सौगात पर रोक संभव नहीं

five state assembly election

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने मान लिया है कि चुनाव से पहले और बाद में पार्टियों और सरकारों की ओर से नागरिकों में मुफ्त में सेवाएं और वस्तुओं बांटने या उसका वादा करने पर रोक लगाना संभव नहीं है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कहा है कि चुनाव के पहले या बाद में चुनावी तोहफे की पेशकश करना संबंधित पार्टी का नीतिगत मामला है। इसके बाद आयोग ने कहा कि इसे नियंत्रित करना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

सुप्रीम कोर्ट में दिए एक हलफनामे में चुनाव आयोग ने कहा है कि इस तरह की नीतियों का क्‍या प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा यह राज्य के मतदाताओं पर निर्भर करेगा। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि वह इस तरह की राजकीय नीतियों और फैसलों का नियमन नहीं कर सकता है, जो जीतने वाली पार्टी की ओर से सरकार बनाने पर लिए जा सकते हैं। कानून में प्रविधानों के बगैर इस तरह का नियमन उसके दायरे से बाहर होंगे।

गौरतलब है कि इन दिनों हर चुनाव से पहले सभी पार्टियां बड़े बड़े वादे कर रही हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि यह ऐसा मसला है जिस पर मतदाताओं को ही फैसला करना होगा। ध्यान रहे चुनाव आयोग मानता रहा है कि उसके पास बहुत सीमित अधिकार है और वह किसी पार्टी का रजिस्ट्रेशन नहीं रद्द कर सकती है। उसने इस तरह के अधिकार दिए जाने की मांग की है। अपने हलफनामे में  आयोग सुप्रीम कोर्ट के 2002 के एक फैसले का भी जिक्र किया है। इसमें सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि चुनाव आयोग के पास तीन आधार को छोड़ कर किसी राजनीतिक दल का पंजीयन रद करने की कोई शक्ति नहीं है।

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