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मध्य प्रदेश में आज शक्ति परीक्षण

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में पिछले दस दिन से चल रहे सियासी नाटक का शुक्रवार को पटाक्षेप हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि शुक्रवार को विधानसभा में विश्वास मत परीक्षण किया जाए और शाम पांच बजे तक इसे पूरा किया जाए। सर्वोच्च अदालत ने भारतीय जनता पार्टी की ओर से की गई सारी मांगें स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि विश्वास मत का परीक्षण शुक्रवार को हो और विधायकों से हाथ उठवा कर वोटिंग कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस की इस मांग पर ध्यान नहीं दिया कि इस्तीफा देने वाले विधायकों के बारे में पहले फैसला किया जाए, उसके बाद विश्वास मत परीक्षण हो।

सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि बेंगलुरू में रखे गए कांग्रेस के 16 विधायक अगर भोपाल जाना चाहें तो कर्नाटक और मध्य प्रदेश की पुलिस उनकी सुरक्षा का बंदोबस्त करे। इससे पहले सर्वोच्च अदालत ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए स्पीकर के सामने विधायकों के पेश होने का सुझाव दिया था पर स्पीकर ने इसे नहीं माना था। इसके बाद अदालत ने आदेश दिया कि विधानसभा स्पीकर नर्मदा प्रसाद प्रजापति विश्वास मत परीक्षण के लिए शुक्रवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं और फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया शाम पांच बजे तक पूरी करें।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने पूरी प्रक्रिया की लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो रिकार्डिंग कराने के आदेश भी दिए। अदालत ने अपने आदेश में कोई कंफ्यूजन नहीं रहने दिया। उसने कहा विधानसभा की कार्यवाही का एकमात्र एजेंडा बहुमत परीक्षण कराना ही हो। बेंच में शामिल जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा- अगर बागी विधायक विधानसभा आना चाहें, तो कर्नाटक और मध्य प्रदेश के डीजीपी उन्हें सुरक्षा दें। अदालत ने विधानसभा के प्रमुख सचिव को जरूरी इंतजाम करने के आदेश दिए।

इससे पहले, भाजपा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन सुनवाई की। सर्वोच्च अदालत ने स्पीकर प्रजापति से पूछा- क्या वे वीडियो लिंक के जरिए बागी विधायकों से बात कर सकते हैं और फिर उनके बारे में फैसला कर सकते हैं? इस पर स्पीकर की तरफ से पेश वकील अभिषेक सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- नहीं, ऐसा संभव नहीं है। स्पीकर को मिले विशेषाधिकार को सुप्रीम कोर्ट भी नहीं हटा सकता। स्पीकर ने 16 बागी विधायकों के इस्तीफों पर फैसला लेने के लिए दो हफ्ते का वक्त मांगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि इतना समय देना सोने की खदान जैसा होगा, इससे हॉर्स ट्रेडिंग बढ़ेगी।

अदालत ने स्पीकर से पूछा कि बागी विधायकों के इस्तीफे के मामले में क्या कोई जांच हुई है और क्या इस पर कोई फैसला किया गया है? इस पर स्पीकर की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जब कोर्ट स्पीकर को तय वक्त के अंदर कुछ कदम उठाने के निर्देश देने लग जाए तो इससे संवैधानिक दिक्कतें पैदा होंगी।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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