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ओडिशा में काेरोना मामले 8000 के पार, 37 की मौत

भुवनेश्वर। ओडिशा में कोरोना वायरस (कोविड-19) के अब तक के सर्वाधिक 561 नये मामले आज दर्ज किये जाने के साथ ही संक्रमितों की संख्या बढ़कर 8000 को पार कर गयी तथा दो और लोगों की मौत से मृतकों का आंकड़ा 37 हो गया।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि संक्रमितों की संख्या बढ़कर 8106 हो गयी है। नये मामलों में 425 क्वारंटीन केंद्रों से सामने आये हैं तथा अब तक के सर्वाधिक 136 मामले स्थानीय संपर्क से जुड़े हैं।

गंजम जिले में दो कोरोना मरीजों की मौत हो गयी। इनमें एक 66 वर्षीय व्यक्ति है और दूसरा 40 वर्षीय पुरूष है। दोनों को कोरोना के अलावा अन्य बीमारियां भी थीं। नये मामलों में गंजम जिले से सर्वाधिक 283 मामले, इसके बाद कटक से 81, रायगडा से 76, खोरदा से 26, बारगढ़ से 21 और बोलनगीर से 19 मामले सामने आये हैं।

सूत्रों ने बताया कि 149 और मरीजों के स्वस्थ होने के बाद रोगमुक्त होने वालों की संख्या बढ़कर 5502 हो गयी है। इसके साथ ही संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होने की दर बढ़कर 67.8 फीसदी पहुंच गयी है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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