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खाटूश्यामजी मंदिर कमेटी के जाली चेक से निकाले करीब बीस लाख

सीकर। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटूश्यामजी मंदिर कमेटी के बैंक खाते से जाली चेक बनाकर करीब बीस लाख रुपए निकाल लेने का मामला सामने आया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सात दिन में दो बार में चेक से रुपए निकालकर की गई धोखाधड़ी का पता उस समय चला जब मंदिर कमेटी ने तीन दिन पहले खाते का विवरण निकाला। इस मामले में कमेटी ने थाने में मामला दर्ज कराया है।

जाली चेकों पर भी कमेटी के पास रखे चेकों के सिरीयल नंबर हैं। वास्तविक चेकों के नम्बर धोखाधड़ी करने वाले व्यक्ति के पास कैसे पहुंचे।

खाटूश्याम मंदिर कमेटी का यह बचत खाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की खाटूश्यामजी शाखा में हैं। जिसमें भक्तों की ओर से दी जाने वाली दान की राशि जमा कराई जाती है। खाते का संचालन कमेटी के अध्यक्ष, मंत्री और कोषाध्यक्ष की ओर से संयुक्त रूप से किया जाता है।

बैंक से विवरण लेने पर सामने आया कि मोहम्मद शेख अनवर जहीर उल्ल हक्क शेख नाम के व्यक्ति ने कमेटी के दो चेक की हुबहू कॉपी तैयार कर उन पर कमेटी के अध्यक्ष, मंत्री और कोषाध्यक्ष के फर्जी हस्ताक्षर कर गत 18 अगस्त को नौ लाख 93 हजार और 24 अगस्त को 9 लाख 95 हजार रुपए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अपने बैंक खाते में जमा करा लिए। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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