कोविंद, नायडू, मोदी ने की कर्तव्य पालन की अपील

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संविधान दिवस को ‘कर्तव्य पर्व’ के रूप में मनाने का आह्वान करते हुए नए भारत के निर्माण के लिए नागरिकों से कर्तव्यों का पालन करने की मंगलवार को अपील की। संसद के केंद्रीय कक्ष में संविधान की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित विशेष समारोह को सम्बोधित करते हुए उन्होंने यह अपील की।

विपक्षी दलों की अनुपस्थिति में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोविंद ने कहा कि देश के सभी नागरिक अपने अधिकारों का पालन करने के साथ ही अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन करना चाहिए ताकि देश के सभी नागरिकों के अधिकारों का पूरी तरह से संरक्षण हो सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने भी कर्तव्य और अधिकार के विषय में यही सीख देते हुए कहा है कि अधिकारों की उत्पति का सच्चा स्रोत कर्तव्यों का पालन है। यदि हर व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करता है तो फिर अधिकारों का आसानी से पालन किया जा सकेगा।

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कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस तथा शिवसेना समेत कोई भी विपक्षी दल समारोह में मौजूद नहीं था। महाराष्ट्र में ‘लोकतंत्र तथा संवैधानिक मूल्यों की हत्या’ का आरोप लगाते हुए उन्होंने कार्यक्रम का बहिष्कार किया। नायडू ने कहा कि अधिकार एवं कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं। मौलिक कर्तव्यों को अधिक महत्व दिये जाने की आवश्यकता है। जब तक हममें से प्रत्येक अपना कर्तव्य नहीं करे तो दूसरों के अधिकार पूरे नहीं हो सकते।

यह समय है कि जब हम अपने को संविधान में वर्णित कर्तव्यों को याद करें और उन्हें गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी केवल सरकारों की ही नहीं है। नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उपराष्ट्रपति ने देश के नागरिकों में मौलिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की और सुझाव दिया कि पाठ्यक्रम में मौलिक कर्तव्यों को भी उचित स्थान पर जोड़ा जाना चाहिए।

मोदी ने कहा कि कर्तव्यों में ही नागरिकों के अधिकारों की रक्षा है और नए भारत के निर्माण के लिए नागरिकों की हर गतिविधि में कर्तव्य पर पूरा जोर होना चाहिए। भारतीय संविधान को वैश्विक लोकतंत्र की सर्वोत्कृष्ट उपलब्धि बताते हुए उन्होंने कहा कि यह नागरिकों को न केवल अधिकारों के प्रति सजग रखता है बल्कि उनके कर्तव्यों के प्रति जागरूक भी बनाता है।

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उन्होंने कहा कि इस पावन मौके पर सभी नागरिक संकल्प लें कि कर्तव्यों से ओत-प्रोत भावना के साथ हम मिलकर देश के नव निर्माण में योगदान देंगे। बिरला ने भारतीय संविधान को देश की सभ्यता, संस्कृति एवं आदर्शो का प्रतिबिंब बताते हुए कहा कि संविधान दिवस को ‘मौलिक कर्तव्य पर्व’ के तौर पर मनाया जाना चाहिए। इसके बताए रास्ते पर चलकर ही नए भारत का निर्माण किया जा सकता है।

उन्होंने सांसदों से आह्वान किया कि वे ऐसा आदर्श प्रस्तुत करें जिससे एक संदेश जाए और लोग अपने कर्तव्यों का पालन करें। उन्होंने कि कहा कि संविधान हमें आदर्शो और कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। यह हमें मौलिक कर्तव्यों और आदर्शो के मूल्यों की भी याद दिलाता है। सिर्फ अधिकारों की बात करने से असंतुलन पैदा होता है और इससे देश की विकास की गति धीमी होती है।

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