देश | जम्मू-कश्मीर | ताजा पोस्ट

जम्मू-कश्मीर में जल्द हो सकती है हल्की बर्फबारी और बारिश

श्रीनगर। मौसम कार्यालय ने आज कहा है कि 22 से 25 जनवरी के बीच जम्मू-कश्मीर के उंचे इलाकों में हल्की से मध्यम बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होने की संभावना है। स्थानीय मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी ने कहा, 23 जनवरी की शाम से 25 जनवरी की शाम तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को एक पश्चिमी विक्षोभ द्वारा प्रभावित करने की संभावना है।

24 जनवरी को मुख्य गतिविधि के दौरान जम्मू और कश्मीर के मैदानी इलाकों में चमक के साथ हल्की से मध्यम बर्फबारी/बारिश होगी। हालांकि हमें पिछले बार की तुलना में कम तीव्रता की बारिश की उम्मीद है। 40 दिनों की कठोर सर्दी ‘चिल्लई कला’ 31 जनवरी को खत्म होगी। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 7.6, पहलगाम में माइनस 8.7 और गुलमर्ग में माइनस 4.2 रहा।

लद्दाख के लेह शहर में रात का न्यूनतम तापमान माइनस 15.1, कारगिल में माइनस 17.4 और द्रास में माइनस 25.6 रहा। इसी तरह जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान 8.4, कटरा में 4.7, बटोटे 6.1, बेनिहाल में 4.2 और भद्रवाह में 1.5 डिग्री रहा।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताजा पोस्ट | समाचार मुख्य

कोरोना से मरने वालों के परिजनों को सरकार मुआवजा नहीं दे सकेगी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कोरोना से मरने वाले हर मरीज के परिजनों को मुआवजा नहीं दे सकती है। कोरोना से मरे लोगों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा दायर किया है, जिसमें उसने कहा है कि वह सबको मुआवजा नहीं दे सकती है। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि कोरोना से जिनकी मौत हुई है, उनके परिवारों को सरकार चार लाख रुपए का मुआवजा नहीं दे सकेगी। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना से होने वाली हर मौत को कोविड मौत के रूप में दर्ज किया जाएगा।

सरकार ने कहा है कि आपदा कानून के तहत अनिवार्य मुआवजा सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ आदि पर ही लागू होता है। सरकार का कहना है कि अगर एक बीमारी से होने वाली मौत पर मुआवजा दिया जाए और दूसरी पर नहीं, तो यह गलत होगा। केंद्र ने 183 पन्नों के अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि इस तरह का भुगतान राज्यों के पास उपलब्ध राज्य आपदा मोचन कोष यानी एसडीआरएफ से होता है। अगर राज्यों को हर मौत के लिए चार लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया गया, तो उनका पूरा फंड ही खत्म हो जाएगा।

केंद्र का कहना है कि अगर कोरोना से मरे लोगों को चार लाख का मुआवजा देने का राज्यों को निर्देश दिया गया तो इससे कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई के साथ ही बाढ़, चक्रवात जैसी आपदाओं से भी लड़ पाना असंभव हो जाएगा। केंद्र ने अदालत को बताया कि कोरोना से होने वाली सभी मौतों को कोविड से हुई मौत के रूप में ही रिकार्ड किया जाना चाहिए। फिर चाहे वह मौतें कहीं भी क्यों न हुईं हों।

गौरतलब है कि अब तक सिर्फ अस्पतालों में हुई कोरोना संक्रमितों की मौत को ही कोविड डेथ के रूप में रिकार्ड किया जाता था। घर पर या अस्पताल की पार्किंग या गेट पर होने वाली मौतों को भी कोविड रिकार्ड में दर्ज नहीं किया जा रहा था। इस वजह से मौत के आंकड़ों में विसंगतियां देखने को मिल रही थीं। सरकार ने इस तरह की हर मौत को कोविड डेथ के रूप में दर्ज करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को करेगा।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *