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सीएए से छुटकारा चाहता है मेघालय : कॉनराड

शिलांग। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने मेघालय में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लागू नहीं किये जाने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा है कि रिपोर्टों में कहा गया है कि अगर राज्य में इनर लाइन परमिट (आईएलपी) लागू किया जाता है, तो उसे छठी अनुसूची से हटा दी जायेगी।

संगमा ने संवाददाताओं से कहा, “ सब कुछ सही नहीं है। एक सामान्य सी बात है कि कुछ अधिकारियों और कुछ राजनीतिक नेताओं ने दिल्ली में कहा था कि चूंकि हमें छठी अनुसूची के तहत छूट है, इसलिए हमें सीएए से आईएलपी के तहत छूट की आवश्यकता क्यों होगी।”

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मुख्यमंत्री ने यह भी कहा, ‘छठी अनुसूची को हटाने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता है। क्योंकि यह राज्य के लोगों को दिया गया एक सुरक्षा और विशेषाधिकार है। हमारी सरकार इस मामले में बहुत स्पष्ट है कि छठी अनुसूची से कोई समझौता नहीं होगा।’ मेघालय की स्थापना दो अप्रैल 1970 को एक स्वायत्त राज्य के रूप में हुई थी, जिसे 21 जनवरी 1972 को असम से अलग कर एक पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया गया और वो संविधान की छठी सूची के अंतर्गत आता है।

छठी सूची के अंतर्गत मेघालय में खासी पहाड़ी,जयंतिया पहाड़ी और गारो पहाड़ी नाम के तीन जिला परिषद हैं। संगमा ने कहा कि राज्य सरकार राज्य में आईएलपी लागू कराने के लिए बहुत दृढ़ है। उन्होंने कहा, “ हम चाहते हैं कि आईएलपी को लागू किया जाए और यही कारण है कि हमने विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया है। अब बाकी काम केंद्र सरकार के हाथ में हैं। कुछ चुनौतियां हैं और इसमें किसी को शक भी नहीं है लेकिन हम केंद्र सरकार को मनाने में कामयाब रहेंगे।”

मेघालय विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक सरकारी प्रस्ताव पारित किया था जिसमें सीएए के पारित होने के बाद राज्य में 1873 में पूर्वी बंगाल फ्रंटियर रेगुलेशन के तहत केंद्र सरकार से आईएलपी को लागू करने का आग्रह किया गया था। संसद में सीएए पारित होने के अगले दिन अमित शाह से मिले मुख्यमंत्री कोरनाड संगमा ने आईएलपी को पूरे राज्य में लागू करने की मांग रखी थी। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ 11 दिसंबर को आईएलपी का दायरा मणिपुर तक बढ़ा दिया गया। मिजोरम,नागालैंड,आंध्र प्रदेश दशकों से आईएलपी के अंतर्गत आते हैं।

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