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जब मुंह का बिगड़ने लगे स्वाद, तो हो जाए सावधान, इस गंभीर बीमारी के हो सकते हैं लक्षण

नई दिल्ली | कोरोना महामारी के इस दौर में अगर में अजीब सा स्वाद (Tast) आने लगे या किसी चीज के खाने पर स्वाद में फर्क लगे तो समझ लीजिए ये एक गंभीर समस्या भी हो सकती है। इस पर आपको ध्यान देने की जरूर है। पूरी दुनिया में लगातार पैर पसारती डायबिटीज (Diabetes) एक ऐसी जटिल समस्या बन चुकी है जो हर किसी को भी अपनी गिरफ्त में लेती जा रही है। इसकी गिरफ्त में आने के बाद भी लंबे समय तक इसके सामान्य लक्षण दिखाई नहीं देते हैं और जब पता लगता है तो देर हो चुकी होती है। डयबिटीज के प्रारंभिक लक्षणों में से एक है मुंह में एक अजीब तरह का स्वाद का आना।

धातु का स्वाद होता है महसूस
एक शोध में पाया गया है कि, मुंह में अजीब तरह का स्वाद विकसित होना भी डायबिटीज का गंभीर लक्षण हो सकता है। कुछ मरीजों ने पहली बार अपने मुंह में एक अजीब सा स्वाद महसूस किया है। मेडिकल वेबसाइट हेल्थलाइन के अनुसार, स्वाद में गड़बड़ी अलग-अलग तरह की हो सकती है, लेकिन इसे अक्सर टेस्ट मेटालिक के रूप में पहचाना जाता है। मेटालिक टेस्ट डिसऑर्डर (Metallic Taste Disorders) है जिसमें व्यक्ति के मुंह में कुछ ना होने पर भी धातु का स्वाद महसूस होता है।

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इसलिए होता है ऐसा
जब शरीर के ब्लड में शुगर (Blood Sugar) का लेवल हाई होने लगता है तो धीरे-धीरे सेंट्रल नर्वस सिस्टम खराब होने लगता है जो बाद में मुंह के स्वाद और गंध को भी नुकसान पहुंचाता है। एक्सपर्ट के अनुसार, पैरागेसिया एक टेस्ट डिसऑर्डर है। जिसमें स्वाद को प्रभावित करने वाली नसें डेमेज हो जाती हैं। इससे मुंह में एक धातु का स्वाद महसूस होने लगता है।

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इसके और भी हो सकते हैं कई कारण
हालांकि, मुंह में धातु का स्वाद (Metallic Taste) विकसित होने का केवल यही एक कारण नहीं है। एनएचएस के अनुसार, इसके कई कारण हो सकते हैं। जैसे- अपच, सर्दी या साइनस संक्रमण, मसूड़े की बीमारी के कारण भी ऐसा हो सकता है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप नियमित रूप से अपने दांतों और मुंह की सफाई करें। इसके बावजूद भी अगर मुंह में धातु का स्वाद लगातार बना रहता है तो आपको डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए।

By वेद प्रताप वैदिक

हिंदी के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले पत्रकार। हिंदी के लिए आंदोलन करने और अंग्रेजी के मठों और गढ़ों में उसे उसका सम्मान दिलाने, स्थापित करने वाले वाले अग्रणी पत्रकार। लेखन और अनुभव इतना व्यापक कि विचार की हिंदी पत्रकारिता के पर्याय बन गए। कन्नड़ भाषी एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने उन्हें भी हिंदी सिखाने की जिम्मेदारी डॉक्टर वैदिक ने निभाई। डॉक्टर वैदिक ने हिंदी को साहित्य, समाज और हिंदी पट्टी की राजनीति की भाषा से निकाल कर राजनय और कूटनीति की भाषा भी बनाई। ‘नई दुनिया’ इंदौर से पत्रकारिता की शुरुआत और फिर दिल्ली में ‘नवभारत टाइम्स’ से लेकर ‘भाषा’ के संपादक तक का बेमिसाल सफर।

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