मनरेगा मजदूरी भुगतान के रूप में अनाज अनुमति दे केंद्र: बघेल

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्यरत श्रमिकों को मजदूरी भुगतान के रूप में अनाज प्रदान करने की अनुमति देने का आग्रह किया किया है।

उन्होंने पत्र में कहा कि मनरेगा के तहत मजदूरी राशि का भुगतान नेशनल इलेक्ट्रानिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम (एनईएफएमएस) के माध्यम से सीधे श्रमिकों के खातों में होता है। कोरोना वायरस के कारण पूरे राज्य में लॉकडाउन (बंद) है। राज्य में 31 लाख 50 हजार सक्रिय परिवारों के 62 लाख 52 हजार व्यक्तियों की आजीविका मनरेगा पर ही निर्भर है। ऐसी स्थिति में योजना का क्रियान्वयन अनिवार्य है।

बघेल ने कहा, राज्य सरकार द्वारा वर्तमान में लगभग 5 लाख श्रमिकों से प्रति दिन सेवा ली जा रही है। मजदूरी की राशि बैंक खाते में क्रेडिट होने के बाद उन्हें अपने भोजन (खाद्यान्न) जैसी प्राथमिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु पहले खातों से पैसा निकालने की आवश्यकता होगी, जिससे वे परेशान तो होंगे ही साथ ही सामाजिक दूरी के पालन में भी कठिनाई होगी।

उनके मुताबिक राज्य शासन के पास पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध है तथा इसके वितरण की प्रभावी व्यवस्था लागू है। मनरेगा के तहत कार्यरत श्रमिकों को मजदूरी के तौर पर धनराशि के स्थान पर अनाज देना उचित रहेगा।

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