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Kashi Vishwanath कॉरिडोर को मुस्लिम समाज की सौगात, ज्ञानवापी मस्जिद की दी जमीन

Kashi Vishwanath Corridor

वाराणसी | Kashi Vishwanath Corridor: काशी में जहां एक तरफ विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Mandir) से सटी ज्ञानवापी मस्जिद की जमीन को लेकर कोर्ट में केस चल रहा है। वहीं दूसरी तरफ काशी विश्वनाश मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) विवाद के बीच एक बड़ी पहल हुई है। मस्जिद की तरफ से मंदिर के लिए मस्जिद से सटी करीब एक हजार स्क्वायर फीट जमीन मुस्लिम समाज ने दी है। जानकारी के अनुसार, इस जमीन पर अभी मंदिर प्रशासन का कंट्रोल रूम था। कोर्ट के बाहर आपसी सहमति के आधार पर हुए इस समझौते में इतनी ही जमीन मंदिर प्रशासन ने भी मुस्लिम समाज को दी है।

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पीएम मोदी द्वारा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Kashi Vishwanath Corridor) की आधारशीला रखे जाने के बाद से तेज गति से बन रहे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में जमीन की जरूरत जरूरत सामने आई। जिसके बाद मुस्लिम समाज ने पहल करते हुए वक्फ की जमीन विश्वनाथ कॉरिडोर को देने पर सहमति जता दी। सहमति के बाद मंदिर की तरफ से बने प्रस्ताव को विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद में रखा गया। वहां से अनुमति मिलते ही जमीन एक-दूसरे की हो जाएगी।

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कोर्ट में चल रहा जमीन विवाद
हिंदू पक्ष का कहना है कि काशी विश्वनाथ मंदिर को औरंगजेब ने 1664 में तहस नहस कर दिया था। फिर इसके अवशेषों से मंदिर की जमीन के एक हिस्से पर मस्जिद बनवाई जिसे ज्ञानवापसी मस्जिद के रूप में जाना जाता है। अपील में कहा गया कि ज्ञानवापी परिसर के उक्त जमीन पर मंदिर का अवशेष है। 14वीं शताब्दी के मंदिर में प्रथमतल में ढांचा और भूतल में तहखाना है। इसमें 100 फुट गहरा शिवलिंग है।

मंदिर हजारों वर्ष पहले 2050 विक्रमी संवत में राजा विक्रमादित्य ने, फिर सतयुग में राजा हरिश्चंद्र और 1780 में अहिल्यावाई होलकर ने जीर्णोद्धार कराया। इसी को ध्यान में रखते हुए ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा पाठ करने का अधिकार देने आदि को लेकर 1991 में मुकदमा दायर किया गया था।

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काशी की अदालत ने विश्वनाथ मंदिर से सटी ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में पुरातात्विक सर्वेक्षण को आदेश दिया है। कोर्ट ने इसके लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित करने का भी निर्देश दिया है।

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