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चीनी भभकी को पेलोसी का ठेंगा!

nancy Pelosi Taiwan visit

नई दिल्ली। चीन की धमकियों की परवाह किए बगैर अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की स्पीकर नैंसी पेलोसी ताइवान पहुंच गई हैं। मंगलवार को भारतीय समय के मुताबिक रात करीब साढ़े बजे पेलोसी का विमान ताइवान में उतरा, जहां ताइवान के विदेश मंत्री ने उनका स्वागत किया। नैंसी पेलोसी के ताइवान पहुंचने पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक चीन ने उनके ताइवान दौरे को बेहद खतरनाक बताया है।

नैंसी पेलोसी ने ताइपेई पहुंचने के बाद ट्विटर पर कहा- हमारे सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का ताइवान दौरा अमेरिका के ताइवान के प्रगतिशील लोकतंत्र के प्रति अडिग समर्थन को दर्शाता है। उन्‍होंने कहा कि ताइवान की लीड‍रशिप के साथ हमारी चर्चा अहम पार्टनर के लिए हमारे समर्थन की पुष्टि करती है और एक मुक्‍त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को आगे बढ़ाने सहित हमारे साझा हितों को बढ़ावा देती है। पेलोसी ने कहा- ताइवान के 23 मिलियन लोगों के साथ अमेरिका की एकजुटता, आज पहले से कहीं अधिक महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि दुनिया लोकतंत्र और निरंकुशता के बीच एक विकल्‍प का सामना कर रही है।

इससे पहले भी चीन ने अमेरिका को नतीजे भुगतने की धमकी दी थी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दोबारा अमेरिका को धमकी दी थी। वांग यी ने कहा था- अमेरिकी जो पेलोसी की विजिट पर सियासत कर रहा है। वो आग से खेल रहा है। उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा। अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए चीन ने अपने लड़ाकू विमान तैनात किए थे और समुद्र में युद्धपोत भी तैयार रहने को कहा था। इतना ही नहीं चीन के सरकारी अखबारी ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने यहां तक धमकी दी थी कि अगर पेलोसी का विमान ताइवान की ओर से गया तो उसे उड़ाया जा सकता है।

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चीन की इन धमकियों की परवाह किए बगैर एशिया के दौरे पर आईं पेलोसी मंगलवार की शाम को ताइवान की राजधानी ताइपेई पहुंचीं। वे मंगलवार की रात को ताइपेई में रूकेंगी और बुधवार को कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। बुधवार को उनका ताइवान की राष्ट्रपति से भी मिलने का कार्यक्रम है। नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा को बड़ा वैश्विक घटनाक्रम माना जा रहा है। गौरतलब है कि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और पेलोसी की यात्रा को वह अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है। इसकी वजह से दोनों देशों में टकराव बढ़ेगा।

तभी चीन ने इस यात्रा को रूकवाने के लिए हर जतन किए। पेलोसी ने एशिया की अपनी यात्रा सिंगापुर से शुरू की थी। उसके बाद वे मलेशिया गई थीं। चीन चाहता था कि वे मलेशिया से वापस लौट जाएं और ताइपेई नहीं जाएं। इसके लिए उसने नतीजे भुगतने की चेतावनी दी और ताइवान की सीमा पर सैन्य अभ्यास भी किया। लेकिन अमेरिका ने भी पूरी तैयारी कर रखी थी। बताया जा रहा है कि कुआलालम्पुर से पेलोसी के उड़ान के भरने के बाद अमेरिकी नौसेना और वायु सेना के 24 लड़ाकू विमान उनको एस्कॉर्ट कर रहे थे। इसके अलावा अमेरिका ने समुद्र अपने चार युद्धपोत हाई अलर्ट पर रखे हैं।

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