नई शिक्षा नीति से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा: शिक्षाविद

नई दिल्ली। जाने माने शिक्षाविदों ने कहा है कि नई शिक्षा नीति के लागू होने से देश में न केवल उच्च शिक्षा का की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि इससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा।

प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो कोलकाता द्वारा आयोजित एक वेबिनार में शिक्षाविदों ने यह राय व्यक्त की।

वेबिनार में एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक जगमोहन सिंह राजपूत भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक तथा पेट्रोलियम एंड एनर्जी विश्वविद्यालय के मीडिया विभाग के डीन केजी सुरेश के अलावा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसरों समेत कई शिक्षाविदों ने वेबिनार में भाग लेते हुए यह विचार व्यक्त किये।

पद्मश्री से सम्मानित राजपूत में कहा कि नई शिक्षा नीति न केवल छात्रों बल्कि शिक्षकों और स्कूल तथा कॉलेज के पूरी शिक्षा प्रणाली के लिए फायदेमंद होगी। इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता भी सुधरेगी और सब का समग्र विकास होगा। इसके साथ ही शोध एवं अनुसंधान कार्यों को बढ़ावा मिलेगा और देश की आर्थिक प्रगति भी होगी।

सुरेश ने कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं और संस्कृति को भी बढ़ावा देने की बात कही गई है। साथ ही प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है जिससे शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव होने की उम्मीद है। एनआईटी दुर्गापुर के कंप्यूटर विभाग के अध्य्क्ष प्रोफेसर डॉक्टर तेन्द्रपाल ने कहा की नयी शिक्षा नीति में छात्रों को व्यवसायिक प्रशिक्षण में मदद मिलेगी और विभिन्न अनुशासन में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्राप्त होगा।

एनआईटी के ही मानविकी विभाग के सहायक प्रोफेसर कृष्णा राय ने कहा कि नई शिक्षा नीति से आत्मनिर्भर भारत बनाने और एक भारत श्रेष्ठ भारत बनाने की परिकल्पना को मदद मिलेगी और देश में शिक्षा के क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश पूंजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

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