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नोटबंदी पर केंद्र व आरबीआई को नोटिस

Shiv Sena Constitution Bench

नई दिल्ली। पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट बंद किए जाने के छह साल बाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई शुरू हो गई। इस पर सुनवाई को सरकार की ओर से समय की बरबादी बताए जाने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि किस कानून के तहत नोटबंदी की गई थी? इस मामले पर नौ नवंबर को आगे की सुनवाई होगी। गौरतलब है कि नवंबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था। इसके खिलाफ 59 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं।

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ सुनवाई कर रही है। जस्टिस एस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने बुधवार को इस पर सुनवाई शुरू की। जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस एएस बोपन्ना, जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम और जस्टिस बीवी नागरत्ना भी इस पीठ में शामिल हैं। पांच जजों की संविधान पीठ ने पूछा कि क्या नोटबंदी का फैसला लागू करने के लिए किसी कानून की जरूरत है या रिजर्व बैंक के कानून के जरिए नोटबंदी हो सकती है? अदालत  ने यह भी कहा कि क्या सुप्रीम कोर्ट को भविष्य के लिए कानून तय नहीं करना चाहिए?

संविधान पीठ ने कहा कि जिस तरह से नोटबंदी को अंजाम दिया गया उस प्रक्रिया के पहलुओं पर गौर करने की जरूरत है। पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस नजीर ने पहले पूछा- अब इस मामले में कुछ बचा है? इस पर जस्टिस गवई ने कहा कि अगर कुछ नहीं बचा तो आगे क्यों बढ़ना चाहिए? तब याचिकाकर्ताओं में से एक के लिए पैरवी कर रहे प्रणव भूषण ने कहा कुछ मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि बाद की सभी अधिसूचनाओं की वैधता, असुविधा से संबंधित मामले, क्या नोटबंदी ने समानता के अधिकार और बोलने व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन किया है? इन पर सुनवाई जरूरी है।

सरकार की तरफ से सॉलिसीटर जनरल उन्हें लगता है कि कुछ अकादमिक मुद्दों के अलावा कुछ भी नहीं बचा है। उनका कहना था यह मामला अब निष्प्रभावी हो गया है। लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व वित्त मंत्री और एक याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम ने कहा कि 1978 की नोटबंदी के लिए अध्यादेश के बाद एक कानून लाया गया था। लेकिन 2016 की नोटबंदी बिना किसी कानून के हुई। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा भविष्य में उत्पन्न हो सकता है।

बुधवार को सारी दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक से विस्तृत हलफनामा मांगा। अदालत ने कहा- मुद्दे का जवाब देने के लिए, हमें सुनवाई करनी होगी। संविधान पीठ ने कहा- हम हमेशा जानते हैं कि लक्ष्मण रेखा कहां है, लेकिन जिस तरह से इसे किया गया था, उसकी जांच की जानी चाहिए। हमें यह तय करने के लिए वकील को सुनना होगा।

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