p chidambaram attacks center मोनेटाइजेशन प्लान पर चिदंरबम ने पूछे 20 सवाल
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मोनेटाइजेशन प्लान पर चिदंरबम ने पूछे 20 सवाल

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p chidambaram attacks center मुंबई। सरकारी संपत्तियों को लीज पर देकर पैसे कमाने की भारत सरकार की योजना नेशनल मोनेटाइजेशन प्लान, एनएमपी को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार से 20 सवाल पूछे। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए चिदंबरम ने शुक्रवार को कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार को अपने इस कदम के मकसद और चार साल की अवधि के दौरान छह लाख करोड़ रुपए का राजस्व जुटाने के मुख्य लक्ष्य के बारे में देश के सामने स्थिति स्पष्ट करना चाहिए।

चिदंबरम ने प्रेस कांफ्रेंस करके कहा कि जिन संपत्तियों की पहचान एनएमपी के तहत की गई है, उनसे मौजूदा समय में भी कोई न कोई राजस्व जरूर मिल रहा होगा। चिदंबरम ने सवाल किया-क्या सरकार ने मौजूदा राजस्व और चार साल की अवधि में मिलने वाले छह लाख करोड़ रुपए के राजस्व में अंतर का आकलन किया? अगर किया है तो फिर इन चार वर्षों में हर साल दोनों राजस्व में कितना अंतर होगा? उन्होंने सवाल किया- एनएमपी के पीछे की मंशा राष्ट्रीय आधारभूत अवसंरचना पाइपालाइन, एनआईपी के समानांतर चलने की है?

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उन्होंने कहा- एनआईपी के लिए एक सौ लाख करोड़ रुपए की जरूत होगी, क्या चार साल में इकट्ठा होने वाला छह लाख करोड़ रुपए का राजस्व एक सौ लाख करोड़ रुपए की परियोजना के वित्तपोषण के लिए पर्याप्त होगा? उन्होंने भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सत्ता में रहते हुए, घाटे में चल रही संपत्तियों का मुद्रीकरण किया, जबकि नरेंद्र मोदी सरकार इसके उलट कर रही है।

चिदंबरम ने कहा- कांग्रेस ने कभी सामरिक महत्व वाली संपत्तियों को नहीं बेचा। हमने हमेशा सुनिश्चित किया कि किसी तरह का एकाधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा- सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि छह लाख करोड़ रुपए के राजस्व का इस्तेमाल 2021-22 के दौरान साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए के राजकोषीय घाटे को भरने में नहीं होगा। चिदंबरम ने सरकार के सामने 20 सवाल रखे और कहा कि सरकार को चिन्हित की गई संपत्तियों के उस मूल्य का खुलासा करना चाहिए जो एक अवधि के बाद सरकार के पास वापस जाएगा।

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बहुत संपत्ति है, कुछ मोनेटाइज करने से फर्क नहीं!

सरकारी संपत्तियों को लीज पर देकर उनसे पैसे कमाने की केंद्र सरकार की नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन योजना की आलोचना के बीच सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने कहा कि सरकार के पास बहुत संपत्ति है। अगर वह उनको मोनेटाइज करती है और कुछ पैसे जुटाकर उसका निवेश नए बुनियादी ढांचे में करती है, या उससे आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर तबके को सपोर्ट देती है, तो उसमें कुछ भी गलत नहीं है।

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