एक साल बाद श्रीनगर में हुई पीडीपी की पहली बैठक

श्रीनगर। पिछले वर्ष पांच अगस्त को केंद्र सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने संबंधी अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद पहली बार आज पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की युवा इकाई की ओर से आयोजित बैठक में पार्टी के नेताओं ने भाग लिया।

पीडीपी के मीडिया सलाहकार सुहैल बुखारी ने यूनीवार्ता को बताया, हमें तीन सितंबर को पार्टी महासचिव गुलाम नबी लोन हंजुरा की ओर से पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की बैठक में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गयी थी।

बुखारी ने कहा, आज हमें यहां मिलने की अनुमति दी गई क्योंकि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने मंगलवार को संसद को सूचित किया था कि कोई व्यक्ति कश्मीर में नजरबंद नहीं है। उन्होंने कहा, हमारे वरिष्ठ नेताओं को सुरक्षा बलों ने तीन सितंबर को बैठक के लिए अपने घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी थी और पार्टी मुख्यालय की ओर जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए गए थे। पार्टी के नेता हालांकि आज की बैठक में शामिल हुए।

उन्होंने कहा कि बैठक युवा पीडीपी अध्यक्ष वहीद उर-रहमान पर्रे ने बुलाई थी, जिन्होंने प्रमंडलीय प्रशासन से उचित अनुमति मांगी थी।उन्होंने कहा कि बैठक में विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया, जिसमें संगठनात्मक मामलों के अलावा जम्मू-कश्मीर की वर्तमान राजनीतिक स्थिति भी शामिल है।

बैठक की अध्यक्षता पार्टी के उपाध्यक्ष अब्दुल रहमान वीरी ने की जबकि महासचिव जी एन लोन हंजुरा, युवा अध्यक्ष पर्रे और पूर्व विधायक बशीर मीर भी इसमें मौजूद थे। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को प्रशासन ने अब तक रिहा नहीं किया है। वह अपने सरकारी निवास पर नजरबंद हैं।

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