नक्सलियों के बंद के आव्हान पर बस्तर में शांति, कारोबार ठप

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) सप्ताह के अंतिम दिन आज नक्सलियों द्वारा बस्तर बंद के आव्हान पर संभाग में आमतौर पर शांति रही। नक्सली इलाकों में करोबार पूर्णतः ठप रहा, और वाहनों की आवाजाही अवरूद्ध रही।

बस्तर से आंध्रप्रदेश, तेलंगाना एवं महाराष्ट्र की ओर जाने वाली बसें रवाना ही नहीं हुई। खौफ के चलते केके लाइन पर संचालित होने वाली एक मात्र पैसेंजर ट्रेन वाल्टेयर से किरंदुल नहीं गई। साथ ही रात में मालगाड़ियों के पहिए भी थमे रहे।

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रेलवे सूत्रों के अनुसार किरंदुल से विशाखापटनम मार्ग पर संचालित होने वाली पैसेंजर ट्रेन आज किरंदुल नहीं गयी, इसे जगदलपुर स्टेशन पर ही रोका गया। रेल प्रशासन ने पूर्व के हमलों को गंभीरता से लेते हुए यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर पैसेंजर ट्रेन को किरंदुल के बजाए जगदलपुर तक ही चलाने का निर्देश जारी किया है। इस मार्ग पर शाम छह बजे के बाद मालगाडियों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है।
बस्तर पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी़ ने बताया कि वारदातों की आशंकावश पुलिस द्वारा प्रत्येक नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

साथ ही अतिसंवेदनशील इलाकों में सघन गश्त सर्चिग की जा रही थी। विशेष कमांडो समूचे बस्तर एवं सीमावर्ती इलाकों का हेलीकाप्टर से हवाई निरीक्षण कर रहे थे। छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाको में तीन राज्यों की पुलिस के जवान निरंतर गश्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ इलाकों में नक्सलियों ने बेनर-पोस्टर लगाए थे, जिन्हें जब्त कर लिया गया है। शहीदी सप्ताह के चलते नक्सली क्षेत्रो में यात्री वाहनों समेत अन्य मालवाहक वाहनों के पहिए थमे रहे।

इन इलाकों में जाने वाली यात्री बसें जगदलपुर से रवाना ही नही हुई। टैक्सी चालकों ने भी वाहनों का परिचालन बंद रखा। कहीं किसी अप्रिय वारदात की खबर नहीं मिली । यात्री वाहन एवं रेलगाड़ी बंद होने से मुसाफिरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गौरतलब है कि वर्ष 2004 में पीडब्ल्यूजी अर्थात पीपुल्स वार ग्रुप के विघटन के बाद माओवादियों ने सरकार व पुलिस से छद्म युद्ध के लिए 2 दिसम्बर 2005 में पीएलजीए अर्थात पीपुल्स लिबेरेशन गुरिल्ला आर्मी का गठन किया था। पीएलजीए की स्थापना के पश्चात प्रति वर्ष नक्सलियों द्वारा स्थापना सप्ताह मनाया जाता है।

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