सीएए विरोधी राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की याचिका खारिज

लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने नागरिकता संशोधन कानून लागू करने का विरोध करने वाले राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति मुनीश्वरनाथ भंडारी और न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता अशोक पांडेय की याचिका को खारिज करते हुए दिए है।

याचिका में कहा गया कि कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री खुलेआम सीएए का विरोध कर रहे हैं और राज्यों में इसे न लागू करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि इन राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने की कार्रवाई करे।

याची का तर्क था कि संसद द्वारा पारित कानून को लागू करने के लिए हर राज्य बाध्य है और इसे लागू करने से इंकार नहीं कर सकते। याची का यह भी कहना था, कि चूंकि केंद्र सरकार इसके बावजूद भी ऐसे राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करने की कार्रवाई नहीं कर रही है।

लिहाजा अदालत द्वारा केंद्र सरकार को इसके लिए निर्देश दिया जाए। याचिका में सिर्फ केंद्र सरकार को ही पक्षकार बनाया गया था। अदालत ने कहा कि याचिका में अन्य जरूरी पक्षकार नहीं बनाए गए हैं ऐसे में याचिका पोषणीय नही है। उधर, केंद्र सरकार की तरफ से सहायक सॉलिसिटर जनरल एसबी पांडेय पेश हुए ।

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