पायलट, सिंधिया विचारधारा से बंधे नेता नहीं: हरिप्रसाद

नई दिल्ली। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से अलग होने और सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री पद और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाए जाने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने दोनों को निशाने पर लिया है और उन्हें राजनीतिक करियर को प्रति आसक्त बताते हुए कहा कि दोनों को विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है।

हरिप्रसाद ने बताया, ये तथाकथित युवा राजनेता करियर (राजनीति में) बनाने के लिए हैं, लेकिन किसी भी पार्टी की विचारधारा के प्रति कोई झुकाव नहीं है।

हरिप्रसाद कांग्रेस के पूर्व महासचिव हैं जो पार्टी के राजस्थान और मध्य प्रदेश मामलों के प्रभारी थे। राज्यसभा में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व कर चुके संसद के पूर्व सदस्य हरिप्रसाद ने कहा, “जब देश गंभीर समस्या का सामना कर रहा हो तो पार्टी से अलग होना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इसमें कोई संदेह नहीं है, सिंधिया और पायलट दोनों प्रतिभाशाली हैं, लेकिन उनकी निष्ठा कुर्सी (पद) के प्रति रही है न कि पार्टी के विचारधारा के प्रति।

उन्होंने याद करते हुए बताया कि 1998 में जब अशोक गहलोत कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष थे, तब हरदेव जोशी, नटवर सिंह, शिवचरण माथुर, और परसराम मदेरणा जैसे पार्टी के नेताओं ने गहलोत को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार कर लिया था, क्योंकि अधिकांश विधायकों ने गहलोत का समर्थन किया था। कांग्रेस नेता ने कहा, विधानसभा चुनाव के बाद 2018 में भी यही हुआ। यहां तक कि नवल किशोर शर्मा ने भी बगावत नहीं की क्योंकि वे सभी नेता पार्टी के साथ थे।

पायलट के राजनीतिक करियर के लिए कांग्रेस ने कितना ध्यान दिया, इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2004 के लोकसभा चुनावों के दौरान – पायलट की पहली चुनावी लड़ाई के दौरान कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने उन्हें चुनाव प्रचार के प्रबंधन के लिए व्यक्तिगत रूप से राजस्थान में तैनात किया था। उन्होंने बताया कि सोनिया ने इनसे कहा था, “बीके देखो कि दौसा में सबकुछ ठीक तो हैं न। 2004 में, मोहसिना किदवई महासचिव प्रभारी थीं, जबकि हरिप्रसाद राजस्थान के प्रभारी सचिव थे।

हरिप्रसाद ने कहा कि 2010 में जब वह मध्य प्रदेश के मामलों के प्रभारी थे तब वह व्यक्तिगत रूप से सिंधिया के पास गए और उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए कहा, जिसे सिंधिया ने तब वरिष्ठ पार्टी नेता अर्जुन सिंह की सहमति के बावजूद मना कर दिया था। हरिप्रसाद सोनिया गांधी की कोर टीम के सदस्य थे और समय-समय पर विभिन्न पड़ावों पर पार्टी के सांसद, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड के प्रभारी रहे हैं। राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष पद संभालने के बाद उन्हें पार्टी महासचिव के पद से हटा दिया गया था, लेकिन तब से उन्हें कर्नाटक राज्य की राजनीति में डाला गया है और विधान परिषद के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।

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