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पेड़ लगाना पृथ्वी को बचाने का अभियान: शिवराज

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कहा कि पेड़ लगाना पृथ्वी को बचाने का अभियान है। यह अत्यंत पुनीत कार्य है। इस पवित्र सामाजिक अभियान को सफल बनाने के लिए वे निकल पड़े हैं, जिसमें आप सबको पूरा सहयोग करना है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार  चौहान ने आज अपने जन्म-दिन के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर मंत्रि-परिषद के सदस्यों, जन-प्रतिनिधि, अधिकारी और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ सामूहिक रूप से पौध-रोपण किया। सभी ने पौधरोपण में अत्यंत उत्साह के साथ हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री का जन्मदिन वृक्ष महोत्सव बन गया।

चौहान ने अपने जन्मदिन पर सुबह सबसे पहले अपने निवास पर बेलपत्र का पौधा रोपा। इस अवसर पर सांसद वी डी शर्मा, मंत्री विजय शाह, डॉ प्रभुराम चौधरी सहित श्री हितानंद और लोकेंद्र पाराशर आदि उपस्थित थे। श्री चौहान ने अपने निवास पर अपने परिवार के साथ पौध-रोपण किया। मुख्यमंत्री के साथ उनकी धर्मपत्नी साधना सिंह, पुत्र कार्तिकेय तथा कुणाल ने नारियल, शमी तथा आँवले के पौधे रोपे।

मुख्यमंत्री ने स्मार्ट सिटी पार्क में मीडिया प्रतिनिधियों के साथ पौध-रोपण किया। उन्होंने बरगद सहित लगभग 25 प्रजातियों के पौधे रोपे। उन्होंने इस अवसर पर धरती को बचाने के लिए पेड़ लगाने के इस पवित्र सामाजिक अभियान में सक्रिय भागीदारी के लिए मीडिया तथा अन्य सभी की सराहना की और धन्यवाद दिया। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम और मंत्रिपरिषद के सदस्यों के साथ विधानसभा परिसर में कदंब के 6 पौधे रोपे।

चौहान ने वल्लभ भवन मंत्रालय में फलदार खिरनी का पौधा लगाया। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने पेल्टाफॉर्म, मंत्री कमल पटेल, मोहन यादव, विधायक कृष्णा गौर, राज्य मंत्री राम खेलावन पटेल ने भी पौधे लगाए। मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने पुत्रंजीवा, अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार ने गूलर का पौधा लगाया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव के के सिंह, मलय श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव, मोहम्मद सुलेमान, एसएन मिश्रा, प्रमुख सचिव नीतेश व्यास, दीप्ति गौर मुखर्जी, कल्पना श्रीवास्तव, दीपाली रस्तोगी, पल्लवी जैन गोविल, नीरज मंडलोई, अशोक शाह, संजय शुक्ला, सत्येन्द्र कुमार सिंह के साथ मंत्रालय के कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक सहित मंत्रालयीन अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे। मंत्रालय परिसर में पीपल, आम, करंज, पाखर और सप्तपर्णी आदि के पौधों का भी रोपण किया गया।

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आईटी नियमों पर सरकार का जवाब

नई दिल्ली। सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बनाए गए नए आईटी नियमों पर केंद्र सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ को जवाब दिया है। भारत सरकार ने कहा है कि नए आईटी नियम सोशल मीडिया के आम यूजर्स को ताकत देने के लिए बनाए गए हैं। केंद्र ने कहा है कि सिविल सोसायटी और दूसरे पक्षों के साथ सलाह मशविरे के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया है। सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने रविवार को इसकी जानकारी दी।

असल में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद के तीन विशेषज्ञों ने 11 जून को भारत सरकार को पत्र लिख कर नए आईटी नियमों पर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि भारत में लागू किए गए नए आईटी नियम अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानदंडों के हिसाब से नहीं हैं। ये ग्लोबल ह्यूमन राइट्स का उल्लंघन करते हैं। भारत सरकार ने इससे इनकार किया है और कहा है कि इनसे आम यूजर्स को ताकत मिलेगी। गौरतलब है कि नए नियमों को लेकर अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर के साथ भारत सरकार की ठनी है।

भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र को बताया है कि उसने जो नए आईटी नियम बनाए हैं उसे 25 फरवरी, 2021 को अधिसूचित किया गया। 26 मई से ये नियम लागू हो गए हैं। सरकार के मुताबिक, इस कानून के तहत किसी भी मैसेज की उत्पत्ति का पता बताने के मसले पर नए बहुत कम जानकारी मांगी जा रही है। ऐसा तभी होगा जब वायरल हो रहा कोई मैसेज हिंसा के लिए उकसा रहा हो, भारत की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचा रहा हो, महिलाओं की छवि खराब कर रहा हो, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा हो या इन मामलों में दखल देने वाला कोई और विकल्प काम नहीं कर रहा हो, तभी सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को यह बताने की जरूरत होगी कि यह मैसेज कहां से शुरू हुआ है।

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