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पीएम केयर्स फंड सरकार का नहीं है

PM cares fund Modi

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की पहली लहर आने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक पीएम केयर्स फंड की स्थापना की थी, जिसमें लोगों ने जम कर दान किए थे और इस फंड में हजारों करोड़ रुपए जमा हो गए। लेकिन अब प्रधानमंत्री कार्यालय, पीएमओ ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि इस फंड पर केंद्र सरकार या राज्य सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। पीएमओ की ओर से दिए गए हलफनामे में कहा गया है कि यह फंड भारत सरकार से नहीं, बल्कि चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा हुआ है और इस कोष में आने वाली राशि भारत सरकार की संचित निधि में नहीं जाती है। PM cares fund Modi

प्रधानमंत्री कार्यालय ने  कहा है पीएम केयर्स फंड को न तो सूचना के अधिकार यानी आरटीआई कानून के दायरे में सार्वजनिक प्राधिकार के रूप में लाया जा सकता है, और न ही इसे राज्य के रूप में सूचीबद्ध किया जा सकता है। गौरतलब है कि इस फंड को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में वकील सम्यक गंगवाल ने एक याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने कहा है कि पीएम केयर्स फंड को राज्य का घोषित किया जाए और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इसे आरटीआई के दायरे में लाया जाए।

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इस याचिका पर प्रधानमंत्री कार्यालय के अवर सचिव प्रदीप श्रीवास्तव ने कोष को लेकर अदालत को जानकारी दी कि ट्रस्ट पूरी पारदर्शिता के साथ काम करता है और इसके फंड का ऑडिट एक ऑडिटर द्वारा किया जाता है। पीएम केयर्स में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस ट्रस्ट को मिले धन और उसका सारा विवरण आधिकारिक वेबसाइट पर डाला जाता है। उन्होंने याचिका के जवाब में कहा कि ट्रस्ट को जो भी दान मिले वो ऑनलाइन, चेक या फिर डिमांड ड्राफ्ट के जरिए मिले हैं और ट्रस्ट इस फंड के सभी खर्चों का ब्योरा अपनी वेबसाइट पर अपडेट करता है।

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सम्यक गंगवाल की याचिका में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के समय देश के नागरिकों को सहायता देने के एक बड़े उद्देश्य के लिए पीएम केयर्स फंड का गठन किया गया था और इसे बहुत मात्रा में दान मिला। याचिका में कहा गया है कि ट्रस्ट को लेकर दिसंबर 2020 में पीएम केयर्स फंड की वेबसाइट पर जानकारी दी गई थी कि यह संविधान या संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के अधीन नहीं बनाई गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि पीएम केयर्स फंड को अपनी वेबसाइट के डोमेन में ‘जीओवी’ का इस्तेमाल करने से रोकना चाहिए।

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