nayaindia PM Visits Gujarat Mata Mandir पावागढ़ मंदिर पर पीएम ने ध्वजा फहराई
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पावागढ़ मंदिर पर पीएम ने ध्वजा फहराई

अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोददी शनिवार को एक बार फिर अपने गृह राज्य गुजरात पहुंचे। गुजरात की इस यात्रा में वे अपनी मां हीराबा से मिले और पावागढ़ मंदिर के शिखर पर पताका फहराई। पांच सौ साल के बाद पावागढ़ मंदिर के शिखर पर ध्वाजारोहण हुआ है। इस मंदिर को पांच सौ साल पहले सुल्तान महमूद बेगड़ा ने तोड़ दिया था। उसके बाद यहां एक दरगाह बना दी गई थी। मुस्लिम समुदाय ने स्वेच्छा से वह दरगाह हटा ली है, जिसके बाद मंदिर पर पताका फहराई गई।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी मां हीराबा से मुलाकात की, जिनका शनिवार को जन्मदिन था। वे अपनी उम्र के सौवें बरस में प्रवेश कर गई हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने अपनी मां के पैर पखार कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे पंचमहल जिले के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पावागढ़ पहुंचे। वहां प्रधानमंत्री मोदी ने महाकाली माता के दर्शन कर विकास कार्यों का उद्घाटन किया और फिर पूजा-अर्चना की। इसके बाद प्रधानमंत्री ने मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया।

प्रधानमंत्री ने इसके बाद खुली जीप में वडोदरा में एक किलोमीटर का रोड शो किया। बाद में वडोदरा में आयोजित गौरव सम्मेलन में उन्होंने कहा- आज मेरे लिए मां वंदना का दिन है, आज सुबह मैंने जन्मदात्री मां का आशीर्वाद लिया और इसके बाद पावागढ़ में जगतजननी मां काली का आशीर्वाद लिया। माताजी के आशीर्वीद से ही मैं देशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि के लिए काम कर पा रहा हूं।

पावागढ़ में मां काली की पूजा-अर्चना और ध्वजारोहण के बाद अपने संबोधन में मोदी ने कहा- पांचवीं सदी तक महाकाली के शिखर पर ध्वज नहीं फहराया जा सका था, लेकिन आज से संभव हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि आज सदियों बाद महाकाली का मंदिर विशाल रूप में हमारे सामने है। इससे पहले मंदिर के न्यासी अशोक पांड्या ने बताया कि मंदिर के शिखर को करीब पांच सौ साल पहले सुल्तान महमूद बेगड़ा ने नष्ट कर दिया था।

मंदिर के मूल शिखर को सुल्तान महमूद बेगड़ा ने 15वीं सदी में चम्पानेर पर किए गए हमले के दौरान ध्वस्त कर दिया था। उन्होंने बताया कि शिखर को ध्वस्त करने के कुछ समय बाद ही मंदिर के ऊपर पीर सदनशाह की दरगाह बना दी गई थी। पांड्या ने बताया- पताका फहराने के लिए खंभा या शिखर की जरूरत होती है। चूंकि मंदिर पर शिखर नहीं था, इसलिए इन वर्षों में फताका भी नहीं फहराई गई।

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