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मुक्त बाजार व्यवस्था में संभावित मंदी एक स्वाभाविक प्रक्रिया : नायडू

रायपुर। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने अर्थव्यवस्था को लेकर उठ रही चिन्ताओं के बीच कहा हैं कि मुक्त बाजार व्यवस्था में संभावित मंदी एक स्वाभाविक प्रक्रिया हैं।नायडू ने आज यहां इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन के 102 वें सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए जीडीपी के हाल के आकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि कोई भी एक आंकड़ा अपने आप में किसी भी अर्थव्यवस्था की तत्कालीन वस्तु स्थिति या उसकी भावी संभावनाओं को ज़ाहिर नहीं कर सकता, जब तक कि उसे हाल की नीतियों, वैधानिक तथा संस्थागत संरचना में किए गए बदलावों के परिपेक्ष्य में नही देखा जाय।

अर्थव्यवस्था में अस्थाई सुस्ती के दौर को बाज़ार की स्वाभाविक चक्रीय प्रवाह बताते हुए उन्होंने निजी क्षेत्र तथा अर्थशास्त्रियों से कहा कि ये समझना होगा कि मुक्त बाजार व्यव्स्था में संभावित मंदी एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।उन्होंने अर्थ व्यवस्था में तेज़ी लाने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार कर राजस्व बढ़ाने के लिए पूरा प्रयास कर रही है।मुद्रीकरण तथा जीएसटी के बाद कर दाताओं की संख्या में हुई वृद्धि का भी उन्होने जिक्र किया।

लोगो को खैरात बांटने की प्रवृत्ति पर उऩ्होने चिन्ता जताते हुए कहा कि इस बारे में सोचने की जरूरत है।धन बांटने से पहले उसका सृजन कैसे हो,इस बारे में केन्द्र की मौजूदा सरकार गंभीरता से सोच रही है। उऩ्होने कहा कि खैरात बांटने की प्रवृत्ति के चलते आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश में 20 प्रतिशत से अधिक लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे है। निरक्षरता एवं कुपोषण जैसी समस्याएं भी है।

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