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Rajasthan: इस बार कोरोना ग्रामीणों की लापरवाही की वजह से फैला है..लेकिन राजस्थान के इस गांव में कोरोना ने किसी को छूआ तक नहीं

जैसलमेर : 2021 में कोरोना की दूसरी लहर ने सभी पर अपना डंक मारा है। और यह कहा जा रहा है कि कोरोना की दूसरी लहर ने इस बार गांवों पर कहर बरसाया हैं। और ये सही भी हैं। गांवों में इस बार करोना की वजह से मौतों के आंकड़े शहरों के मुकाबले कई गुना ज्यादा थे। लेकिन कुछ गांव कोरोना से बिल्कुल अछुते रहे हैं। इसी कड़ी में राजस्थान के जैसलमेर का यह इलाका कोरोना से जंग जीत गया है। यह इलाका पश्चिमी राजस्थान में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित जैसलमेर जिले में स्थित है। जैसलमेर जिले मुख्यालय से करीब 125 से 250 किलोमीटर तक का शाहगढ़ क्षेत्र आकार में काफी बड़ा है। सैकड़ों किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस इलाके में करीब 10 हजार लोगों की आबादी निवास करती है। लेकिन कोरोना महामारी यहां दस्तक तक नहीं दे पाई है।  यह इलाका अब तक इस महामारी से पूरी तरह से सुरक्षित रहा हैं। जहां एक तरफ गांवों में कोरोना मरीजों की लाशे उठ रही थी शमशान घाट में जलाने के लिए जगह तक नहीं थी उस समय इस गांव में कोई कोरोना संक्रमित भी नहीं हुआ था। राजस्थान का यह गांव अब पुरे देश के लिए मिसाल बन गया हैं।बॉर्डर पर सटे होने के कारण इस इलाके में सेना के जवानों की आवाजाही होती रहती है। सेना का इलाका होने के कारण अनुशासित रहता है। सेना के इलाकों मे कोई भी अप्रिय घटना घटित नहीं कर सकते है।

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इन तीन पंचायतों तक नहीं पहुंच पाया कोरोना

सराकर ने कोरोना की गाइडलाइन तो अभी बनाई है लेकिन इस गांव के लोग ऐसी गाइडलाइन का पालन वर्षों पहले से करते आ रहे है। इसकी एक वजह यह भी है कि लोगों ने पहले से ही खुद को सतर्क कर लिया जिससे किसी की जान की हानि ना हो। कोरोना वायरस ने ऐसी कोई जगह नहीं छोड़ी जहां अपना संक्रमण ना फैलाया हो। लेकिन तह तक जाने पर पता चलता है कि अभी भी कुछ जगह ऐसी है जहां कोरोना का संक्रमण नहीं फैला है। कोरोना ने अपनी दूसरी लहर में सीमावर्ती जैसलमेर जिले की 206 में से 203 ग्राम पंचायतों तक पांव पसार लिए थे। लेकिन वह शाहगढ़ और गत वर्ष इससे अलग कर बनाई गई दो अन्य ग्राम पंचायतों हरनाऊ और मांधला तक यह नहीं पहुंच पाई। राजस्थान का यह रेतीला इलाका अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के अलावा यहां के रहने वाले लोगों के आपसी भाईचारे के लिए भी प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि यहा पर रहने वाले लोगों के बीच इतना घनिष्ठ संबंध है। दस हजार लोगों की आबादी वाले इस गांव के लोग बड़ो ही प्रेम और भईचारे के साथ रहते है।

प्रशासन कर रहा तारीफ

जिला मुख्यालय से सैकड़ों किमी की दूरी पर बसे इन ग्रामीणों तक कोरोना नहीं पहुंचने का बड़ा कारण यह था कि इन ग्रामीणों का बाहरी लोगों से किसी भी प्रकार का कोई संपर्क नहीं था। जिले में वैसे दो दर्जन ग्राम पंचायतें सीमावर्ती इलाके में शामिल की जाती हैं. लेकिन उनमें से केवल तीन ग्राम पंचायतों के कोरोना से बचे रहने पर प्रशासन भी ग्रामीणों की जीवन शैली की सराहना करते नहीं थकता है।

तीनों ग्राम पंचायतें बनी एक मिसाल

जैसलमेर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नारायणसिंह चारण ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में जिले के शहरों-कस्बों के साथ गांवों तक में संक्रमण के मामले सामने आए। ऐसे में शाहगढ़ क्षेत्र की तीन ग्राम पंचायतें एक मिसाल बनकर उभरी हैं।  कोरोना से बचकर रहने के लिए इस सीमाई क्षेत्र के लोगों की तारीफ की जानी चाहिए। ये लोगों के घर जहां-जहां दूर-दूर हैं। वहीं ये लोग बेवजह इधर-घूमते भी नहीं हैं। सामाजिक दूरी का ये लोग बहुते पहले से ही पालन कर रहे हैं।

संपर्क साधने का कोई साधन नहीं

इस इलाके के लोगों की एक अलग ही दुनिया है। यहां के लोगों का बाहरी लोगों से बेहद कम संपर्क है। गांव में किसी प्रकार का मनोरंजन का कोई साधन नहीं है। जहां पर ये जाकर एक-दूसरे से मिल सकें। यह गांव रेतीली भूमि में होने के कारण यहां पर धोरों के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। घोटारू से मुरार और मांधला से जनिया गांव तक ऐन अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे शाहगढ़ क्षेत्र में करीब दस हजार की आबादी निवास करती है। मुख्य तौर पर पशुपालन करने वाले ग्रामीणों का ज्यादा संपर्क बाहरी दुनिया से नहीं रहता है। चुनिंदा लोग जरूरी सामान लेने के लिए सम, रामगढ़ या जैसलमेर के बाजार तक आते हैं। वे अपने साथ दूसरों के लिए भी खरीदारी करके ले आते हैं। राशन का सामान लेने के ये लोग महीने में एक बार पास के बाजार में जाते है तो सारा सामान एक साथ ले आते है।

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