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आरपीआई ने यूपी विधानसभा उपचुनाव में दिया भाजपा को समर्थन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सात विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) ने भारतीय जनता पार्टी को अपना समर्थन दिया है। बता दें कि आरपीआई (अठावले) एनडीए में एक सहयोगी दल के रूप में शामिल है।

अब यूपी विधानसभा उपचुनाव में भी उसने अपना समर्थन दिया है। आरपीआई (अठावले) के प्रदेश अध्यक्ष पवन भाई गुप्ता ने भाजपा उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री सुनील बंसल से मुलाकात कर समर्थन की घोषणा की।

पवन भाई गुप्ता ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री डॉ. रामदास अठावले के निर्देश पर उत्तर प्रदेश की 7 विधानसभा सीटों – फिरोजाबाद की टूंडला, उन्नाव की बांगरमऊ, जौनपुर की मल्हनी, देवरिया की सदर, बुलंदशहर, कानपुर की घाटमपुर सीट और अमरोहा की नौगावां सीटों पर होने वाले उपचुनाव में आरपीआई (अठावले) ने अपना समर्थन भाजपा को दिया है।

उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले), एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) में एक सहयोगी दल के रूप में शामिल है। डॉ. रामदास अठावले केंद्र में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री के रूप में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में आरपीआई (अठावले) का कारवां तेजी से बढ़ रहा है। पूरे प्रदेश से आरपीआई को भरपूर स्नेह एवं समर्थन मिल रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर 7 विधानसभा सीटों पर आरपीआई (अठावले) ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की है।

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राजनीति

आय कर की नई साइट किसका फितूर!

Nirmala Sitharaman

यह समझ में नहीं आने वाली बात है कि आय कर विभाग की नई वेबसाइट बनाने का फितूर पहले किसके दिमाग में आया! और दूसरा सवाल यह है कि इंफोसिस के जरिए साइट बनवाने का आइडिया किसका था? आय कर विभाग की वेबसाइट बहुत अच्छे तरीके से काम कर रही थी। किसी को कोई परेशानी नहीं थी और न कोई शिकायत थी। फिर अचानक एक दिन तय हुआ कि आय कर रिटर्न फाइल करने के लिए नई वेबसाइट बनाई जाएगी। साइट बन कर तैयार हो गई तो इसका खूब प्रचार भी किया गया। करदाताओं को ई-मेल और मैसेजेज के जरिए बताया गया कि नई साइट लांच हो रही है। लेकिन साइट लांच होने के बाद से ठीक से काम नहीं कर रही है और पिछले करीब दो हफ्ते से काफी काम रूका पड़ा है।

जब वेबसाइट में तकनीकी खामी की शिकायतें मिलीं तो वित्त मंत्री ने इसका संज्ञान लिया। उन्होंने इंफोसिस के अधिकारियों से बात की। उन्होंने इंफोसिस के संस्थापकों में से एक नंदन नीलेकणी को टैग करके ट्विट भी किया। उन लोगों ने सुधार के उपाय भी किए पर बात नहीं बनी। अब वित्त मंत्रालय की ओर से इंफोसिस को एक हफ्ते का समय दिया गया है। ध्यान रहे आय कर विभाग ने रिटर्न भरने की तारीख आगे बढ़ा दी है। लोग सितंबर के आखिरी दिन तक रिटर्न भर सकते हैं। लेकिन कोरोना वायरस की दूसरी लहर कम होने के बाद काफी लोग रिटर्न फाइल करने के प्रयास कर रहे हैं। लेकिन वेबसाइट की तकनीकी खामियों के चलते कामयाबी नहीं मिल रही है। सो, सरकार का राजस्व अटका है और चारों तक अफरा-तफरी है। इस बीच यह अटकल भी लगाई जा रही है कि वित्त मंत्रालय या सीबीडीटी में किसने नई वेबसाइट बनवाने का आइडिया दिया था।

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