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ईडी की हिरासत में राउत!

मुंबई। केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे मुखर आलोचकों में से एक राज्यसभा सांसद संजय राउत को प्रवर्तन निदेशालय, ईडी ने हिरासत में ले लिया है। शिव सेना के प्रवक्ता और पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादक संजय राउत को पात्रा चॉल घोटाले में रविवार को हिरासत में लिया गया है। इससे पहले ईडी की टीम ने रविवार की सुबह संजय राउत के आवास सहित कई परिसरों में छापा मारा और उसके बाद उनको हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के बाद राउत भगवा गमछा लहराते घर से निकले और कहा कि वे आखिरी सांस तक शिवसेना नहीं छोड़ेंगे।

हालांकि राउत के वकील ने कहा है कि वे हिरासत में नहीं हैं, बल्कि ईडीके समन पर पूछताछ के लिए ईडी के ऑफिस में गए हैं। गौरतलब है कि ईडी ने संजय राउत को दो बार समन भेजा था लेकिन वे एजेंसी के सामने हाजिर नहीं हुए।  ईडी की टीम रविवार सुबह सात बजे के करीब शिव सेना नेता संजय राउत के आवास पर पहुंची। अधिकारियों ने राउत से पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में थोड़ी देर तक पूछताछ की। उसके बाद उनको हिरासत में ले लिया। ईडी की टीम के साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स यानी सीआरपीएफ के जवान व अधिकारी भी थे। राउत के यहां से छापेमारी में 11 लाख रुपए मिले।

हिरासत में लिए जाने के बाद संजय राऊत मकान से बाहर निकले तो उन्होंने भगवा गमछा लिया हुआ था, जिसे उन्होंने लहराया और अपने समर्थकों की ओर विक्टरी का इशारा भी किया। रविवार को राउत के आवास के अलावा पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में ईडी की तीन टीमों ने अलग-अलग जगहों पर तलाशी ली। हालांकि संजय राउत ने इस भूमि घोटाले में अपनी किसी भूमिका से इनकार किया है। उन्होंने कहा- महाराष्ट्र और शिव सेना की लड़ाई जारी रहेगी।

पिछले दिनों ईडी दफ्तर के बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए राउत ने कहा था- मुझे किसी तरह का भय नहीं है क्योंकि मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी कोई गलती नहीं की है। उन्होंने कहा था कि यदि यह राजनीतिक साजिश है तो इसकी जानकारी बाद में मिल जाएगी। पात्रा चॉल भूमि घोटाले के बारे में उन्होंने कहा- मेरा पात्रा चॉल से कोई संबंध नहीं है। वो चॉल कहां है ये भी पता नहीं। मैंने आज तक कोई गलत काम नही किया है।

इस मामले में ईडी का दावा है कि पात्रा चॉल के 672 परिवारों के पुनर्वास के लिए  सोसायटी, म्हाडा और गुरू आशीष कंस्ट्रक्शन कंपनी के बीच करार हुआ था। गुरू आशीष कंपनी के डायरेक्टर थे एचडीआईएल के राकेश वाधवान, सारंग वाधवान और प्रवीण राउत। इनके ऊपर आरोप है कि इन्होंने असली किरायदारों को मकान नहीं दिए और दूसरी कंपनी बना कर एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की। यह भी आरोप है कि प्रवीण राउत ने संजय राउत की पत्नी को 83 लाख रुपए दिए थे।

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