Corona : वैज्ञानिकों ने बताया भारत में कब होगा कोरोना के पीक का समय और इस महामारी का अंत

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कोरोना की दूसरी लहर ने भारत में कोहराम मचा रखा है। आये दिन मौते के नये आंकड़े दर्ज हो रहे है। भारतीयों को बुरी तरह बर्बाद कर के रख दिया है। ऐसे में वैज्ञानिकों का दावा है कि भारत में कोरोना की तीसरी लहर भी आएगी। भारत में कोरोना की तीसरी लहर आना निश्चित है जिसे कोई नहीं रोक सकता है। पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह देने वाली एक टीम ने कहा था कि अप्रैल में भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण अपने पीक पर होगा। हालांकि यह अनुमान गलत साबित हो गया। अब वैज्ञानिकों ने गणना करके बताया है कि देश को कब कोरोना से राहत मिलेगी। वैज्ञानिको के अनुसार भारत में कोरोना का पीक मई के मध्य में आएगा। उसके बाद मामले घटने शुरु हो जाएंगे।

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एक दिन में कोरोना के 4 लाख से ज्‍यादा मामले

देश में लगातार 3 दिनों से कोरोना संक्रमण के रोजाना 4 लाख से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। वहीं बीते एक दिन में 4,200 से ज्‍यादा लोगों की जान गई हैं। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि आंकड़ों को कम करके बताया जा रहा है, क्योंकि श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए लाइनें लग रही हैं। यहां तक कि कई शहरों में सड़कों पर चिताएं जलानी पड़ी हैं। सरकारी आंकड़ो और शमशान घाट में जल रही चिताओं का आंकड़ा बिल्कुल अलग है। शवों को जलाने के लिए जगह नहीं है। लंबी लाइन लगानी पड़ रही है। कुछ मामलों में तो जहां जहग नहीं म्ल रही है उन शवों को दफनाया जा रहा है।

राज्य सरकारें लगा रही लॉकडाउन

ज्यादा संक्रमण वाले राज्यों ने लॉकडाउन, नाइट कर्फ्यु जैसी पाबंदियों का सहारा लिया है। देश में कोरोना वायरस की हालत चिंताजनक है। ऐसे में कोरोना की चेन तोड़ना आवश्यक है। इसके लिए राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर लॉकडाउन लगा रही है। राजस्थान ने 24 मई तक का संपूर्ण लॉकडाउन लगा दिया है। इसके साथ ही हरियाणा, उतरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश सहित कई अन्य राज्यों ने लॉकडाउन जैसी पाबंदिया लगा दी है। कर्नाटक में एक दिन में 50,000 मामले दर्ज हो रहे है। केंद्र ने भी देशव्यापी लॉकडाउन पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि कोरोना के बढ़ते मामलों के देखते हुए केंद्र भी नेशनल लॉकडाउन पर विचार कर रहा है।

कुछ दिनों बाद आएगा कोरोना का पीक

ब्लूमबर्ग क्विंट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक हैदराबाद में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के प्रोफेसर माथुकुमल्ली विद्यासागर ने कहा है कि हमारे पुर्वानुमान के मुताबिक अगले कुछ दिनों में भारत में कोरोना का पीक देखने को मिल सकता है।  मौजूदा अनुमान के मुताबिक जून के आखिर तक देश में  रोजाना 20 हजार मामले सामने आ सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार मई के मध्य तक कोरोना का पीक आएगा और उसके बाद कोरोना के मामले कम होना शुरु हो जाएंगे। कोरोना की दूसरी लहर के लक्षण पहली लहर से बिल्कुल है।

पहले अप्रैल में पीक आने का था अनुमान

प्रोफेसर माथुकुमल्ली विद्यासागर ने आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल द्वारा तैयार किए गए मॉडल का उल्‍लेख भी किया है, जिसमें प्रो.अग्रवाल की टीम ने भविष्यवाणी की थी कि अप्रैल के मध्य तक कोरोना की लहर अपने चरम पर होगी। यह अनुमान गलत साबित हुआ और मई महीने में भी संक्रमण और मौतों के आंकड़े बढ़ने का सिलसिला जारी है। हालांकि बाद में प्रो. अग्रवाल ने 7 मई को कोरोना पीक आने की बात कही।

नए वैरिएंट को माना जा रहा जिम्‍मेदार

देश में पिछले 15 दिनों से कोरोना के 3 लाख से ज्‍यादा मामले दर्ज हो रहे हैं। इसके साथ ही देश में अब तक कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके लोगों की कुल संख्‍या 2 करोड़ को पार कर चुकी है। मामलों में बढ़ोतरी के लिए नए वैरिएंट और सुरक्षा उपायों में ढील को जिम्‍मेदार बताया जा रहा है। दुनिया में सबसे ज्यादा मामले भारत में दर्ज हो रहे है। भारत में चिकित्सा व्यवस्था चरमराई हुई है। कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन, बैड, वैंटिलेटर नहीं मिल रहे है यंहा तक कि शमशान घाट में शवों को जलाने के लिए जगह भी नहीं मिल रही है। लोग पार्किंग में, फुटपाथ पर शव जला रहे है। भारत में कोरोना की भयावहता का जिम्मेदार नया वैरिएंट भी है। कोरोना वायरस लगातार अपना रूप बदल रहा है। इस बजह से यह और भयानक होता जा रहा है।

11 जून तक 4 लाख से ज्‍यादा मौतों का अनुमान

वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह भारत के लिए मुश्किल होंगे। वहीं बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान की एक टीम ने एक गणितीय मॉडल का उपयोग करते हुए बताया है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो 11 जून तक देश में 4,04,000 मौतें होने का अनुमान है। जबकि देश में अभी ही 2 लाख से ज्‍यादा मौतें हो चुकी हैं।

 

पूरी दुनिया को है खतरा

भारत में बिगड़ रहे हालातों से पूरी दुनिया को खतरा है। यूनिसेफ की प्रमुख हेनरीटा फोर ने कहा है कि भारत में कोविड-19 की भयावह स्थिति पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी है। वैज्ञानिक भी इस बात से चिंतित है कि जैसे ही नए स्ट्रेन दूसरे देशों में पहुंचेंगे यह महामारी पूरी दुनिया में तबाही मचाएगी। भारत में एक स्ट्रेन मिला है जो वर्तमान से 15 गुना ज्यादा खतरनाक है।

तीसरी लहर भी दे रही दस्तक

वैज्ञानिको का ये दावा है कि भारत में जल्द ही तीसरी लहर भी दस्तक देगी। कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि तीसरी लहर कब तक आएगी इसका कोई पुर्वानुमान नही है। और कुछ वैज्ञानिकों का यह कहना है कि तीसरी लहर सितंबर-अक्टूबर तक भारत में दस्तक देगी। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में दूसरी लहर से यह हालत है जब तीसरी लहर आएगी तब क्या हालत होगी। और तीसरी लहर ज्यादा प्रभाव बच्चों पर डालेगी। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी तीसरी लहर को लेकर चिंता जता ही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार को अभी से तैयारी करनी होगी, क्योंकि अगर तीसरी लहर बच्चों पर असर डालती है तो बच्चों का इलाज, उनके मां-बाप का क्या होगा, ये सब सोचना होगा। साथ ही डॉक्टर्स, नर्स का बैक-अप प्लान भी तैयार करके रखना होगा।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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