कोरोना रूपी दुश्मन तो 'दृश्य' था लेकिन भारत सरकार जरूर 'अदृश्य' हो गई, क्या अब लोग बोलेंगे बार -बार मोदी सरकार..... - Naya India
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कोरोना रूपी दुश्मन तो ‘दृश्य’ था लेकिन भारत सरकार जरूर ‘अदृश्य’ हो गई, क्या अब लोग बोलेंगे बार -बार मोदी सरकार…..

New Delhi: कोरोना की दूसरी लहर से देशभर में जो हालात उत्पन्न हुए हैं यह किसी से भी छुपा हुआ नहीं है. भले ही देश की मीडिया ने कभी इन मसलों को अपनी गंभीरता से नहीं दिखाया. लेकिन अब विदेशों से आ रहे बयानों से यह बात साफ है कि भारत की क्या इमेज बन कर आई है. कोरोना की दूसरे लहर के दौरान अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अपने नागरिकों को स्पष्ट तौर पर कहा था कि जितनी जल्दी हो सके अपने देश लौट आए क्योंकि भारत में मेडिकल इक्विपमेंट की भारी कमी है. इस बात से तो इनकार नहीं किया जा सकता कि कोरोना के पिक के दौरान उत्पन्न हुई स्थितियों ने भारत सरकार की तैयारियों की पोल विश्व भर में खोल कर रख दी. कोरोना की पहली लहर से लेकर कोरोना के दूसरे लहर तक भारत सरकार ने तैयारियों के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जिसकी सजा पूरे देश के लोगों को भुगतनी पड़ी. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि कोरोना रूपी दुश्मन तो दृश्य था लेकिन भारत सरकार जरूर अदृश्य हो गई.

कोरोना के खतरे के बीच हो रहा था नमस्ते ट्रंप का आयोजन

भारत में कोरोना की दूसरी लहर के पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहुंचे थे. सबको पता है कि ट्रंप भारत अमेरिका में होने वाले चुनाव के मद्देनजर भारत आए थे. भारत सरकार ने भी ट्रंप के आगमन पर अपनी ओर से कोई कमी नहीं छोड़ी थी और नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम का जोर शोर से आयोजन किया गया था. इस माहौल में भी देश के कुछ बड़े डॉक्टर और विशेषज्ञ लगातार केंद्र सरकार को कोरोना की दूसरी लहर की चेतावनी दे रहे थे लेकिन सरकार उस समय भी गंभीर नहीं हुई और तैयारियों के नाम पर कुछ भी नहीं किया.

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राजनीतिक स्वार्थ भी बनी बड़ी वजह

कोरोना की दूसरी लहर से बेपरवाह भारत सरकार लगातार राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों पर अपना ध्यान केंद्रित करती रही. पहले बिहार चुनाव और उसके बाद बंगाल चुनाव भारत सरकार ने कोरोना संक्रमण पर ध्यान ना देते हुए अपनी चुनावी महत्वाकांक्षाओं को ज्यादा अहम समझा. बात में भारत सरकार के साथ ही चुनाव आयोग को भी कोर्ट के द्वारा गंभीर टिप्पणियां की गई. मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग पर यह तक कह दिया कि चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों पर कोरोना से वह मौत के मामलों में मुकदमा चलना चाहिए.

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वैक्सीन खरीदने में भी दिखी लापरवाही

बता दें कि भारत सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में गिना जाता है इसके बाद भी जनवरी 2021 तक भारत ने कोरोना की वैक्सीन के लिए कोई आर्डर नहीं किया. जब दूसरे देश लगातार वैक्सीन निर्माता कंपनियों को अपने नागरिकों के लिए आर्डर दे रहे थे तब भारत सरकार अपने चुनावी साध साधने में लगी हुई थी. समय के साथ ही भारत सरकार की यह नाकामी भी सामने आ गई. हाल के दिनों में वैक्सीन कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला ने भारत सरकार पर वैक्सीन के आर्डर नहीं देने का आरोप लगाते हुए कहा था कि जब आर्डर दिए जाने चाहिए थे तब आर्डर नहीं दिए गए.

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