Third wave News : तीसरी लहर के बच्चों को प्रभावित करने के कोई प्रमाण नहीं..
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Good News: वैज्ञानिकों ने कहा तीसरी लहर के बच्चों को प्रभावित करने के कोई प्रमाण नहीं, माहौल बनाने से बचना होगा

New Delhi | Third wave News : भारत में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जो कुछ हुआ है उससे आम लोगों के साथ ही सरकार भी दबाव में है. यहीं कारण है कि देश के सरकार वैज्ञानिकों की बात को इमानदारी से ले रही है. अब एक बार फिर से कोरोना को लेकर कुछ राहत की खबर आई है. केंद्र सरकार की वैज्ञानिक सलाहकारों ने कहा है कि अभी तीसरी लहर के बारें में कुछ भी कहना जल्दबाजी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अबतक इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिलता है कि कोरोना महामारी की अगली या तीसरी लहर से बच्चों को ज्यादा प्रभावित करेगी. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक के आंकड़ों को देखकर ये जरूर लग रहा है कि कुछ बच्चे कोरोना के संक्रमण के शिकार हो रहे हैं. इसलिए बच्चों का अऊभी खास ख्याल रखने की जरूरत है और जितना हो सके बच्चों को अभी घरों के बाहर जाने से रोका जाना चाहिए.

प्रमाण के बिना तीसरे लहर का् माहौल बनाने से बचना चाहिए

Third wave News :  वैक्सीनेशन पर बात करते हुए राष्ट्रीय तकनीकी परामर्श समूह के चेयरमैन डॉ. एनके अरोड़ा ने भी इस बात को दोहराया कि अब तक के आंकड़ों से इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे प्रभावित होने वाले हैं. उन्होंने कहा कि हमें ऐसा माहौल बनाने से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर में हर उम्र के लोग कोरोना के शिकार हुए हैं ये और बात है कि इस बार संक्रमितों में युवाओं की सेख्या पिछले बार से ज्यादा है. इसके पीछे का कारण ये ये भी है कि कोरोना की पहली लहर का प्रकोप को देखते हुए इस बार ज्यादा उम्र के लोगों ने ज्यादा सावधानी बरती है और युवा लापरवाह नजर आए हैं. शायद इसी कारण कोरोना के ज्यादा शिकार युवा ही हुए हैं.

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तीसरी लहर के बारे में अभी कुछ भी कहना संभव नहीं

Third wave News :  डॉ. अरोड़ा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि फिलहाल कोरोना की तीसरी लहर के बारे में कुछ भी बोलना संभन नहीं है. उन्होंने कहा कि दूसरे देशों के आंकड़ों और अनुभवों के आधार पर इस पर विश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि आने वाले हफ्तों, महीनों या अगली लहर में महामारी का बच्चों पर ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. बता दें कि इससे पहले भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा बताया जा चुका है कि तीसरी लहर में बच्चों के ज्यादा प्रभावित होने के ठोस वैज्ञानिक संकेत नहीं हैं. इसके लिए वे पहली और दूसरी लहर के बीच समानता की दलील देते हुए तीसरी लहर के अलग होने की आशंका को निराधार बता रहे हैं.

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