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सेवा कोर के जवान भी तैनात होंगे मोर्चों पर

नई दिल्ली। सेना को चुस्त-दुरूस्त बनाने तथा उसकी मारक क्षमता बढाने की कवायद के तहत अब सेवा कोर की स्पलाई कंपनी और स्पलाई डिपो के जवानों को भी फील्ड में मोर्चों पर तैनात किया जायेगा। सेना की ढाई सौ वर्षों से भी पुरानी सेवा कोर फील्ड तथा शांति दोनों क्षेत्रों में बने स्टेशनों पर सैन्य साजो सामान और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति करती है।

सेना में व्यापक सुधारों के उद्देश्य से किये गये विभिन्न अध्ययनों के साथ- साथ जवानों की अधिकतम उपयोगिता के लिए आंतरिक स्तर पर भी एक अध्ययन किया गया। अध्ययन यह पता लगाने के लिए किया गया कि सेना सेवा कोर में एक ही काम के लिए अधिक जवान तैनात हैं या नहीं और यदि ऐसा है तो इस स्थिति को कैसे ठीक किया जाये। इससे सेना को अधिक जनशक्ति मिलेगी और जवानों की बेहतर तरीके से तैनाती में मदद मिलेगी। सेना के एक अधिकारी ने आज बताया कि सेना को दक्ष तथा कुशल बनाने के लिए इस तरह के निर्णय नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक डिविजन में सेवा कोर की एक बटालियन तथा एक अतिरिक्त ट्रांसपोर्ट बटालियन होती है जो फील्ड और शांति क्षेत्रों में सैन्य साजो सामान की आपूर्ति सुनिश्चित करती है। अधिकारी ने बताया कि अध्ययन में पता चला कि शांति क्षेत्रों में इस काम के लिए जरूरत से अधिक जवान तैनात हैं और करीब आधे जवानों के पास तकनीकी रूप से काम नहीं है। इस तरह एक ही काम के लिए एक से अधिक जवान तैनात हैं। उन्होंने कहा कि सप्लाई कंपनी और सप्लाई डिपो में यह विशेष रूप से देखने का मिलता है। इनमें तैनात 200 जवानों की जगह आधे यानी 100 जवानों से भी सेवा कोर का मूल काम लिया जा सकता है।

इस तरह अतिरिक्त 100 जवानों को फील्ड में विभिन्न अभियानों में काम में लिया जा सकता है। अभी सेना में प्रयोग के तौर पर दो यूनिटों में इसे आजमा कर देखा गया है। अधिकारी ने कहा कि सेना में शीर्ष स्तर पर इस अध्ययन के परिणामों की जल्द ही समीक्षा की जायेगी और इसके बाद अतिरिक्त जवानों को फील्ड यूनिटों में तैनात किया जायेगा। इससे सेना और अधिक दक्ष , चुस्त दुरूस्त बनेगी तथा उसकी मारक क्षमता भी बढेगी। सेना ने पुनर्गठन और व्यापक सुधारों के तहत हाल ही में सेना मुख्यालय में तैनात 200 से भी अधिक अधिकारियों को फील्ड में भेजने का निर्णय लिया था।

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