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NCERT  की ‘छोकरी‘ पर आखिर क्यों मचा घमासान, की देनी पड़ी सफाई

New Delhi: देशभर में कोरोना की लहर के कारण शिक्षा व्यवस्था का क्या हाल है ये अभी किसी से भी छुपा नहीं है. लेकिन हाल में क्लास वन की एक हिंदी की कविता ने खूब सुर्खियां बटोरी है. सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनलों तक में इस कविता का जिक्र हो रहा है. जानकारी के अनुसार कक्षा एक में पढ़ाई जा रही हूं हिंदी की पुस्तिका में एक कविता है जिसका नाम ‘आम की टोकरी’. NCERT की किताब किस कविता से विवाद इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि इसमें छोकरी शब्द का प्रयोग हुआ है. ट्विटर पर भी ये शब्द काफी ट्रेंड किया गया है. इसे काफी ट्रेंड किया जा रहा है. इस कविता में प्रयुक्त ‘छोकरी‘  शब्द से लोगों को आपत्ति है. लोगों का कहना है कि जब बच्चे इस तरह के शब्दों का प्रयोग करेंगे तो बड़े होकर उनसे क्या उम्मीद की जा सकती है.

क्या है कविता में

कक्षा 1 के बच्चों के लिए रिमझिम नाम की एक हिंदी की किताब जारी की गई है. इस किताब में शामिल यह कविता आम की टोकरी ले जाती बच्ची पर है. इसी कविता आम की टोकरी ले जाने वाली बच्ची के लिए छोकरी शब्द का प्रयोग किया गया है जिसे लोग आपत्तिजनक कह रहे हैं. कविता में 16 साल की बच्ची को छोकरी शब्द से संबोधन किया जा रहा है. इस कविता को लिखकर सोशल मीडिया पर लोग तरह तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कुछ लोग इस कविता को पाठ्यक्रम से हटाने की मांग कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि इस तरह के शब्दों के प्रयोग से बच्चों की मानसिक स्थिति पर गलत प्रभाव पड़ता है. हालांकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस कविता का समर्थन कर रहे हैं उनका कहना है कि कविता में कुछ भी गलत नहीं है.

15 सालों से पढ़ाई जा रही है कविता

बता दें कि यह कोई नई कविता नहीं है जिसे NCERT ने बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया जानकारी के अनुसार इस कविता को 2006 में ही पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया गया था और तब से यह कविता बच्चों की पढ़ाई का एक हिस्सा रही है. रिमझिम नाम की इस किताब ने शामिल कविता रामकृष्ण शर्मा खद्दर ने लिखी है. छत्तीसगढ़ कैडर के 2009 बैच के IAS अधिकारी अवनीश शरण ने इस कविता को अपने ट्विटर अकाउंट पर साझा करते हुए लिखा है.. ये किस सड़क छाप कवि की रचना है?? कृपया इस पाठ को पाठ्यपुस्तक से बाहर करें.

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NCERT ने कुछ यूं दिया जवाब

लगातार लोगों की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए अब NCERT ने भी अपनी ओर से सफाई दी है. NCERT ने अपना पक्ष रखते हुए ट्वीट कर कहा है कि नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2005 के अनुसार इस कविता को शामिल किया गया है. जिसका मकसद स्थानीय भाषाओं की शब्दावली को बच्चों तक पहुंचाना है. ताकि बच्चों को सीखना रुचिकर लगे.

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