instructions pollution Supreme Court सुप्रीम कोर्ट के प्रदूषण पर सख्त निर्देश
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सुप्रीम कोर्ट के प्रदूषण पर सख्त निर्देश

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के राज्यों को शुक्रवार को निर्देश दिया कि वे वायु प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन पर आयोग के आदेशों को लागू करें। शीर्ष न्यायालय ने इस बात पर दुख जताया कि मीडिया के कुछ हिस्से ने उसे ऐसे ‘‘खलनायक’’ के तौर पर ‘‘चित्रित’’ किया है, जो (न्यायालय) यहां स्कूलों को बंद कराना चाहता है।

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प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की विशेष पीठ ने कहा कि यदि सरकारें खुद से सबकुछ करे तो जनहित याचिका जैसे उपायों की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। पीठ ने कहा कि न्यायालय मामले को बंद नहीं करेगा तथा प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए राज्यों द्वारा उठाये जाने वाले कदमों की निगरानी करेगा।

पीठ ने कहा, हर दिन, हम इस मामले की निगरानी नहीं कर सकते। हमें उन्हें काम करने देना होगा। हम निगरानी कर रहे हैं और इसके साथ सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव डाल रहे हैं।

इस बीच, पीठ ने दिल्ली सरकार को कोविड-19 की तीसरी लहर की संभावना के मद्देनजर कई स्थानों पर अस्पतालों का निर्माण कार्य बहाल करने की अनुमति दी। पीठ ने कहा, हम दिल्ली सरकार को आदेश में बताये गये उपाय फिलहाल के लिए लागू करने का निर्देश देते हैं और हम मामले को लंबित रखेंगे तथा विषय को अगले शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध करते हैं…दिल्ली सरकार द्वार मांगी गई निर्माण कार्य की अनुमति दी जाती है।

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हलफनामे में कहा गया है कि 17 उड़न दस्तों का गठन किया गया है, जो न्यायालय और आयोग के आदेशों के तहत विभिन्न कदमों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगे और 24 घंटों में इनकी संख्या बढ़ाकर 40 की जाएगी। इसमें कहा गया है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले और स्वच्छ ईंधन की मदद से चलने वाले ट्रकों को छोड़कर शेष ट्रकों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘हमने एक बात पर गौर किया है कि जाने-अनजाने में मीडिया का कुछ हिस्सा हमें ऐसे खलनायक की तरह पेश कर रहा है, जो स्कूल बंद कराना चाहता है।  न्यायालय ने केंद्र और दिल्ली सरकार को प्रदूषण को काबू में करने के लिए 24 घंटे में सुझाव देने का निर्देश देते हुए बृहस्पतिवार को कहा था कि दिल्ली-एनसीआर में खराब होती वायु गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिए जमीनी स्तर पर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा।

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