Rajasthan : अभिभावकों को नहीं देनी होगी पूरी फीस, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया हाईकोर्ट का आदेश - Naya India
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Rajasthan : अभिभावकों को नहीं देनी होगी पूरी फीस, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया हाईकोर्ट का आदेश

जयपुर। Rajasthan School Fees : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राजस्थान के निजी स्कूलों में अध्ययनरत छात्रों के अभिभावकों को बड़ी राहत (Supreme Court Relief in School Fees) देते हुए निजी स्कूलों की फीस पर संशय खत्म कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने न केवल शिक्षण सत्र 2020-21 में स्कूलों की ओर से बढ़ाई गई फीस का बोझ कम किया है, बल्कि शिक्षण सत्र 2019-20 से भी फीस 15 प्रतिशत कम कर दी है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर और दिनेश महेश्‍वरी की बेंच ने दिया है। य‍ह सुनवाई जोधपुर के इंडियन स्‍कूल और राज्‍य सरकार व अन्‍य संबंधित केस पर हुई है।

शिक्षण सत्र 2020-21 की फीस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों द्वारा बढ़ाई गई फीस नहीं देनी होगी, बल्कि शिक्षण सत्र 2019-20 से भी 15 प्रतिशत फीस कम देनी होगी। कोर्ट ने 2016 के राज्य के फीस अधिनियम व उसके नियमों को वैध ठहराया। यह भी कहा कि फीस 2016 के कानून के अुनसार तय करके ही ली जाए। पिछले की फीस में रियायत के लिए दिए गए कोर्ट के आदेश का मौजूदा सत्र पर कोई असर नहीं रहेगा।

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ऐसे समझें: स्कूल और अभिभावक
स्कूलों के लिए: जो छात्र कोरोना की मार के कारण फीस नहीं भर सकते हैं, स्कूल उनकी समस्या का समाधान निकालें। स्कूल चाहें तो अपने स्तर पर फीस और कम कर सकते हैं, उसमें कोर्ट का फैसला बाध्य नहीं होगा।

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अभिभावकों के लिए: फीस सत्र 2019-20 से 15 प्रतिशत कम देनी है फीस देने के मेंअक्षम छात्रों का न परिणाम रोका जाएगा और नहीं 10वीं और 12वीं की परीक्षा से वंचित किया जाएगा। इन विद्यार्थियों को आॅनलाइन क्लास से भी वंचित नहीं किया जाएगा।

बता दें कि निजी स्‍कूल प्रबंध राज्‍य सरकारों के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए थे। जिसमें कहा गया था कि राज्‍य के सीबीएसई से संबद्ध स्‍कूल 70 फीसदी तक स्‍कूल फीस वसूल सकते हैं। वहीं जो स्‍कूल राजस्‍थान बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन से संबद्ध हैं, वो 60 फीसदी फीस वसूल सकते हैं। ऐसा मार्च 2020 के बाद कोरोना महामारी के कारण कम किए गए सिलेबस के कारण किया गया था।

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